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30 साल बाद दिन के 11 बजे खुला कृषि बाजार, 15% अधिक कारोबार

5 वर्ष पहले
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समयसेपहले खुलीं दुकानें। समय से पहले पहुंचे ग्राहक और समय से पहले शुरू हो गया कारोबार। मंगलवार को कृषि बाजार समिति का नजारा बदला-बदला सा था। यहां तमाम कारोबारी लेन-देन समय से पहले शुरू हुए। 30 साल बाद बाजार समिति की दुकानें छह घंटे पहले खुलीं। समिति बोर्ड के निर्णय के पहले दिन कृषि बाजार की 21 दुकानें नए समय पर खुलीं। दिन के 11 बजे ही कृषि बाजार समिति परिसर गुलजार हो गया। ग्राहकों को खरीदारी के लिए अधिक समय मिला। टुंडी और तोपचांची से आने वाले कारोबारी छह घंटे पहले दुकानें खुलने से अधिक खुश नजर आए। इसका असर कारोबार पर भी दिखा। कारोबार में 15 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया।

1. कारोबारका समय बढ़ेगा : दोपहर3 बजे के बाद दुकानें खुलने पर कारोबार के लिए कम समय मिलता था। 3 से 5 घंटे ही कृषि बाजार समिति में चहल-कदमी रहती थी। दिन के 11 बजे दुकानें खुलती हैं, तो खरीद-बिक्री करने के लिए 5 से 8 घंटे का वक्त मिलेगा।

2.दूरके कारोबारी लौट पाएंगे घर: कृषिबाजार समिति से खरीदारी करने के लिए गिरिडीह, जामताड़ा और बोकारो से कारोबारी आते हैं। टुंडी और तोपचांची जैसे उग्रवाद प्रभावित इलाकों से भी दुकानदार यहां आते हैं। जल्दी दुकानें खुलने पर वे खरीद-बिक्री कर घर लौट पाएंगे।

दिन के 11 बजे खुलीं कृषि बाजार समिति की दुकानें।

पूर्वी टुंडी के मोहन उन राशन दुकानदारों में एक हैं, जो नए समय पर दुकानदारी करने पहुंचे। दिन के 11 बजे दुकानों के खुलते ही मोहन खरीदारी शुरू कर देते हैं। दोपहर 2 बजते ही खरीदारी पूरी हो गई। मोहन पहली बार खरीदारी कर घर लौटने की स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि दोपहर 3 बजे के बाद दुकानें खुलने पर रात 8 बजे तक खरीदारी पूरी होती थी। ऐसे में पूर्वी टुंडी लौट पाना संभव नहीं होता था। ऐसी स्थिति में उन्हें धनबाद में अपने एक रिश्तेदार के घर रुकना पड़ता था। जल्दी दुकानें खुलने से वे पहली बार खरीदारी कर घर लौट रहे हैं।

बंद दुकानों के सामने चहल-कदमी शुरू हो गई है। दोपहर 3 बजे जैसा कारोबारी माहौल अभी ही बन गया है। खुदरा कारोबारी छह घंटा पहले खरीदारी करने पहुंच गए हैं। बाजार समिति की दुकानें एक-एक कर खुलती हैं। देखते ही देखते 21 दुकानों के शटर खुल गए। धीरे-धीरे सभी दुकानदार व्यस्त होते जा रहे हैं। नए समय (दिन के 11 बजे) पर दुकान खोलने को लेकर बना संशय टूट रहा है। खरीदार की कमी नजर नहीं रही है। सबकुछ सामान्य है। खरीदारों की मौजूदगी से दुकानदार उत्साहित हैं।

बाजार समिति चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव विकास कंधवे ने बताया कि साल 1984 में बाजार समिति अस्तित्व में आया। साल 1985 तक बाजार समिति की दुकानें दिन के 10 बजे खुलती थीं। धीरे-धीरे दुकान खुलने का समय बढ़ता गया। साल 1986 के बाद ऐसा दौर आया कि यहां की दुकानें दोपहर 3 बजे के बाद खुलने लगीं। बाजार 3 से 5 घंटे का ही रह गया।

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