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अपहरण और हत्या में प्रदीप को दो-दो उम्रकैद

7 वर्ष पहले
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(सजा के बाद प्रदीप को जेल ले जाती पुलिस)​
धनबाद। डीएवी बनियाहीर की आठवीं कक्षा के छात्र सौरभ कुमार का अपहरण कर हत्या करने के मामले में आरोपी प्रदीप सिंह उर्फ राहुल सिंह को मंगलवार को प्रधान जिला जज अंबुज नाथ की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई, वहीं एक अन्य आरोपी मुजाबिर खान को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने स्पीडी ट्रायल में दो वर्ष में फैसला सुना दिया। प्रधान जिला जज ने प्रदीप सिंह को धारा 302 में उम्रकैद 10 हजार रुपए जुर्माना, धारा 364ए में उम्रकैद 10 हजार रुपए जुर्माना एवं धारा 201 में सात वर्ष कैद 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी।
सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसी मामले के दो अन्य आरोपी के खिलाफ लंबित हैं। दोनों जुबेनाइल हैं और उनके मामले की सुनवाई जुबेनाइल जस्टिस बोर्ड में चल रही है। एक नाबालिग सजायाफ्ता प्रदीप का चचेरा भाई है, जबकि दूसरा नाबालिग बरी हुए मुजाबिर का भाई है।
जितिया के दिन सजा पर संतुष्ट नहीं पिता : 8 वीं के छात्र सौरभ का अपहरण व हत्याकांड में मुख्य आरोपी प्रदीप को दोहरी उम्रकैद। झरिया . जितिया के दिन बेटे के हत्यारों को उम्र कैद मिली, तो मां-बाप की आंखों में खौफनाक मंजर तैरने लगे। पिता सुरेंद्र लोहार हालांकि संतुष्ट नहीं। कहा, ऊपरी कोर्ट से हत्यारों की मौत मांगेंगे।
स्वीकृति बयान में प्रदीप ने मान ली थी हत्या की बात : पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि एक नाबालिग आरोपी के पिता से सौरभ के पिता का डिश कारोबार का विवाद चल रहा था। सुरेंद्र लोहार का धंधा अच्छा चल रहा था। इसलिए व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता में सुनियोजित साजिश रच सौरभ को निशाना बनाया गया।

पिता का डिश विवाद बना हत्या का कारण : घटना की शाम 4 बजे मृणाल दास नामक शिक्षक के घर ट्यूशन पढ़ने सौरभ निकला था। पुलिस चार्जशीट के अनुसार सौरभ के साथ उसका एक दोस्त भी थे। जिलयगोरा में प्रदीप सिंह और एक नाबालिग आरोपी मिला। तीनों सौरभ को लेकर बंगल की झाड़ियों में ले गए। वहां शराब पी। इसी दौरान गमछे से सौरभ का गला घोंट दिया। दो दिन बाद जंगल से सौरभ का शव मिला।
17 अगस्त 2012 को ट्यूशन पढ़ने निकले बनियाडीह हनुमानगढ़ी निवासी छात्र सौरभ को अगवा कर हत्या कर दी गई थी। अपहर्ताओं ने उनके पिता बीसीसीएलकर्मी पिता सुरेंद्र लोहार से 20 लाख रुपए की फिरौती मांगी थी। पिता ने थाने में अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बाद में अनुसंधान में पता चला कि सौरभ के दोस्तों ने ही उसे अगवा कर हत्या कर दी थी। मामले में चार लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें दो नाबालिग थे।

गमछे से गला घोंट कर की गई थी हत्या
हत्या कर बच्चे के पिता से मांगे थे 20 लाख रुपए
दो आरोपियों के खिलाफ जुबेनाइल जस्टिस बोर्ड में की जा रही है सुनवाई
एक अन्य आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
सौरभ हत्याकांड : अदालत ने दो वर्ष में सुनाया फैसला
हत्याकांड और इससे जुड़ी कार्रवाई की अहम तारीखें
हत्या : 17अगस्त 2012
चार्जशीट: 9अक्टूबर 2012
चार्जफ्रेम: 16अप्रैल 2013
गवाह: 19लोगों का बयान दर्ज
साक्ष्यबंद : 20अगस्त 2014
आरोपियोंका बयान : 22अगस्त 14

72 तारीखों में हुआ फैसला : पुलिस ने 19 अगस्त 2012 को प्रदीप सिंह को हिरासत में लिया तो पूछताछ में सौरभ की हत्या की बात कबूल की थी। प्रदीप ने कहा था कि हत्या के बाद लाश को झाड़ी के पास गड्ढे में फेंक दिया था। गला में गमछा लपेटकर पटक दिया था। सौरभ के नीचे गिरने पर उनके दोनों सहयोगियों ने सौरभ के हाथ-पैर पकड़ रहे थे। उसने गमछे के फंदे को कस दिया था। सौरभ शांत हो गया था। एक ने बोला था कि सांस चल रहा है। तब उसने सौरभ के सिर पर पत्थर मार दिया था।