आओस्कूल चलें हम, स्
गोबर और कीचड़ के बीच स्थित इस विद्यालय में बदबू मच्छरों के साथ बच्चों को पढ़ाया जाता है। शिक्षिकाओं का कहना है कि ऐसे वातावरण में बच्चों को पढ़ाना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना प्रतीत होता है। गंदगी की वजह से वहां पढ़ने वाले बच्चों की तबीयत खराब होने का डर हमेशा बना रहता है। जिस स्थान पर सामान्य व्यक्ति चंद मिनट नहीं रुक सकता है, वहां ये बच्चें 6 घंटे तक रुक कर कैसे पढ़ते हैं, यह शोध का विषय है।
आओस्कूल चलें हम, स्लोगन का मजाक उड़ाता है हीरापुर बिनोद नगर स्थित प्राथमिक विद्यालय। इस विद्यालय में पहली कक्षा से पांचवीं तक की पढ़ाई होती है। दो कमरों में 44 बच्चों को पढ़ाया जाता है। बरमसिया ओवरब्रिज के पास अवस्थित इस विद्यालय के चारो तरफ गोबर, कीचड़ और गंदगी का साम्राज्य कायम है, जिससे यहां पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बिना कीचड़ से सने स्कूल पहुंचना नामुमकिन है। सवाल यह है कि बच्चे स्कूल कैसे जाए। वहीं से चंद कदमों की दूरी पर केन्द्रीय विद्यालय-1 में बच्चों के जाने के लिए नवनिर्मित बरमसिया ओवरब्रिज की रेलिंग को तोड़कर नए रास्ता का निर्माण किया गया है, जबकि वहीं उसी स्थान पर मात्र 25 फीट की सड़क को वर्षों से गंदगी मुक्त नहींं किया जा सका है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढाई मात्र सपना ही रह जाएगा। अभिभावकों के अनुसार वे मजबूरी में अपने बच्चों को इस नरक समान स्कूल में भेजते हैं। अगर उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी होती तो वह अपने बच्चें को किसी दूसरे स्कूल में भेजते।
बदबू और गंदगी के बीच होती है पढ़ाई
अतिक्रमण कर दबंगों ने बसाया है खटाल
स्कूल में आने-जाने का नहीं है रास्ता,मवेशियों के बीच पढ़ते है बच्चे, दर्जनों बार कर चुके हैं शिकायत
कीचड़ बदबू के बीच प्राथमिक विद्यालय