नए भाजपा जिलाध्यक्ष के लिए आज होगी रायशुमारी
भाजपाजिलाध्यक्ष को लेकर गुरुवार को होने वाली रायशुमारी ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को गरमा दिया है। किसके पक्ष में सहमति बनती है या तो रायशुमारी के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन पार्टी जिलाध्यक्ष बनने की की दौड़ में शामिल सभी दावेदारों ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी है। अपने पक्ष में आम सहमति बनाने के लिए दावेदार सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक से लेकर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और मंडल अध्यक्षों की गणेश परिक्रमा करने में जी जान से जट गए हैं। गणेश परिक्रमा का यह खेल एक सप्ताह से जारी है। हर दावेदार अपने को मजबूत स्थिति में बता रहा है। कोई अपने को सांसद का करीबी बता रहा है तो किसी को अपने अनुभवी होने का लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं एक-दो दावेदार मंडल अध्यक्ष के समर्थन का दावा कर रहा है। किसके दावे में कितना दम है यह कल स्पष्ट हो जाएगा। पार्टी नेताओं की माने तो केन्द्रीय कमेटी ने स्पष्ट कर दिया है कि जिलाध्यक्ष को लेकर चुनाव नहीं होगा। रायशुमारी कर किसी एक नाम पर सहमति बनाने का स्पष्ट निर्देश है। इसी निर्देश के आलोक में गुरुवार को प्रेक्षक के रूप में लक्ष्मण टुडू, प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा और जिला चुनाव प्रभारी मनोज सिंह धनबाद रहे हैं। तीनों की मौजूदगी में राय ली जाएगी। सांसद, विधायक,मेयर, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, जिला कमेटी के पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष और निवर्तमान मंडल अध्यक्ष अपनी राय रख सकते हैं।
खेमे में बंटे हैं दावेदार
अध्यक्षपद की दौड़ में एक-दो नहीं बल्कि पूरे छह दावेदार हैं। सभी के आका अलग-अलग हैं। कोई सांसद का खास है तो कोई विधायक का और कोई मेयर को अपना गॉडफादर मान रहा है। सभी के अपने-अपने दावे हैं। एक का दावा है कि उसे मेयर के साथ बाघमारा विधायक का भी समर्थन है। पार्टी सूत्रों की माने तो खेमेबाजी के इस खेल में प्रस्ताव और समर्थक जुटाना मुश्किल हो गया है। वैसे सांसद की पसंद पर इस बार भी मुहर लगना लगभग तय माना जा रहा है। सांसद की पसंद कौन है, यह रायशुमारी के बाद स्पष्ट हो जाने की उम्मीद है।
प्रस्तावक पर हंगामा होना तय
गुरुवारको होने वाली रायशुमारी में हंगामा होना तय है। यह हंगामा पार्टी बनाए गए नए निगम को लेकर होना तय दिख रहा है। नए निगम के अनुसार हर दावेदार को 9-9 प्रस्तावक और समर्थकों की सूची पर्यवेक्षक को सौंपनी होगी। जो अपने प्रस्तावकों की सूची देंगे, उसी दावेदार के नाम को रायशुमारी में रखा जाएगा। इसकी पुष्टि पार्टी जिलाध्यक्ष हरि प्रकाश लाटा ने भी की है। जिलाध्यक्ष के अनुसार जिला चुनाव प्रभारी ने यह का यह निर्देश है। पार्टी के इस नियम का कई दावेदार खुल कर विरोध कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष की दौड़ में शामिल भाजयुमो जिलाध्यक्ष मुकेश पांडेय और किसान मोर्चा के मंत्री रामदेव महतो ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जब अध्यक्ष का चयन रायशुमारी से ही होना है तो प्रस्तावक की शर्त क्यों। अगर प्रस्तावक की सूची अनिवार्य है तो फिर चुनावी कार्यक्रम घोषित किया जाए। दावेदारों से नामांकन कराया जाए और वोटिंग के माध्यम से अध्यक्ष का चुनाव किया जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो रायशुमारी बैठक में हंगामा होना तय है। वहीं रामदेव की मांग है की मंडल की संख्या के आधार पर ग्रामीण और शहरी अध्यक्ष का प्रावधान किया जाना चाहिए।
राजकुमार सिंह
मजबूतपक्ष- पुरानेकार्यकर्ता, मिलनसार
कमजोरपक्ष- चुनावमें ही सक्रिय होते हैं।
रामदेव महतो
मजबूतपक्ष- पुरानेअनुभवी कार्यकर्ता
कमजोरपक्ष- गुटमें उलझे रहते हैं।
नितिन भट्ट
मजबूतपक्ष- सांसदके करीबी, मृदुभाषी
कमजोरपक्ष- समाजमें पहचान सीमित।
मुकेश पांडेय
मजबूतपक्ष- सांगठनिककार्यक्रम कराने में आगे।
कमजोरपक्ष- बड़ेनेताओं से समन्वय में कमी।
अरुण राय
मजबूतपक्ष- संगठनमें अनुभवी छवि
कमजोरपक्ष - किसीखास के होने का ठप्पा
चंद्रशेखर सिंह
मजबूतपक्ष- अनुभवी,तीन बार महामंत्री रहे।
कमजोरपक्ष- अपनोंसे समन्वय का अभाव।