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कमाई बंटने के डर से पार्षद नहीं बना रहे कमेटियां

5 वर्ष पहले
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नगर आयुक्त, मेयर कर चुके हैं अपील

वार्डोंमें सड़क-नाली के ठेकों से होनेवाली कमाई में हिस्सेदार बढ़ जाएं, यह डर नगर निगम के पार्षदों को सता रहा है। तभी तो उन्होंने अब तक किसी वार्ड में क्षेत्र सभा गठित की है और ही वार्ड कमेटी बनाई है। यही नहीं, हर वार्ड में पांच-पांच उप समितियों का भी गठन करना था। लेकिन कोई पार्षद ऐसा चाहता ही नहीं है। वार्ड कमेटी बनाने के सिलसिले में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी की थी। इसमें कमेटी गठन को अनिवार्य बताया गया था। नगर विकास विभाग ने 25 जनवरी तक सभी कमेटियों का गठन कर लेने का निर्देश दिया था, लेकिन पार्षदों ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। अंतिम तिथि गुजर जाने के बावजूद किसी वार्ड में सुगबुगाहट शुरू नहीं हुई। अभी तक किसी पार्षद ने कमेटी बनाने के संबंध में निगम को आवेदन नहीं दिया है। गौरतलब है कि झारखंड नगरपालिका वार्ड क्षेत्र प्रतिनिधि मनोनयन नियमावली के तहत हर वार्ड में क्षेत्र सभा के साथ वार्ड कमेटी, जलापूर्ति उप समिति, स्वच्छता उपसमिति, नागरिक सुविधा, स्वनियोजन और वार्ड कल्याण समिति का गठन किया जाना है।

वार्डों में प्रस्तावित क्षेत्र सभा का प्रतिनिधि बनने के लिए नागरिकों का पढ़ा-लिखा होना जरूरी है। हर 4 से 5 बूथ पर एक क्षेत्र प्रतिनिधि का मनोनयन होगा। यह मनोनयन अंकों के आधार पर होगा। कुल अंक 100 तय किए गए हैं- शैक्षणिक योग्यता पर 50, जिम्मेवार नागरिक होने पर 30 और वार्ड में पांच साल से निवास करने पर 20 अंक।

13 जनवरी को पार्षदों के साथ हुई बैठक में नगर आयुक्त छवि रंजन ने सभी से जल्द कमेटियां गठित करने का अनुरोध किया था। इसकी जरूरत और उद्देश्यों के बारे में भी बताया था। इससे पहले 16 दिसंबर को हुई निगम बोर्ड की बैठक में मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल और तत्कालीन नगर आयुक्त विनोद शंकर सिंह ने भी पार्षदों से कमेटियां बनाने का अनुरोध किया था। उस बैठक में तो कुछ पार्षदों ने आशंका भी जता दी थी कि कहीं कमेटियां बनाना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा हो जाए।

राज्य सरकार को करना है फैसला

^क्षेत्रसभा और वार्ड कमेटियां गठन का आदेश राज्य सरकार का है। पार्षद कमेटियां बनाते हैं या नहीं, यह देखना निगम का काम नहीं है। सरकार के निर्देश को देखते हुए नियमावली की जानकारी पार्षदों को दे दी गई है। अगर वे कमेटियां नहीं बनाते, तो इस पर कोई भी निर्णय सरकार ही ले सकती है। -चंद्रशेखर अग्रवाल, मेयर

}योजनाओं का ब्लू प्रिंट वार्ड में ही तैयार करना। } जलापूर्ति योजना का मूल्यांकन करना। } मलिन बस्ती के लिए स्टैंड पोस्ट की अनुशंसा करना। } पेयजल शुल्क वसूली में सहयोग करना। } कचरा संग्रहण शुल्क वसूली में सहयोग करना। } वार्ड में कचरा जमा होने की सूचना देना। } केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए लाभुकों के चयन में सहयोग करना। } स्ट्रीट लाइट लगाने के संबंध में सुझाव देना।

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