राज्यमें किसानों
Q आप पर कृषि यांत्रिकीकरण योजना के तहत कंपनियों को शॉर्ट लिस्ट करने में गड़बड़ी का आरोप है, क्या कहना है?
Aकोई गड़बड़ी नहीं हुई है, जो भी हुआ है नियमानुसार ही हुआ है।
Qफिर वैसी कंपनियां क्यों शॉर्ट लिस्ट हुईं, जो मानक को पूरा नहीं कर रही थीं?
Aजब तक मैं कागजात नहीं देखता, कैसे बता सकता हूं।
Qविभाग द्वारा इस गड़बड़ी के मामले में आपको शोकॉज नोटिस दिया गया है?
Aहां, शोकॉज नोटिस मिला है, लेकिन उसमें क्या आरोप है यह नहीं बताया गया है। जब तक आरोपों का पूरा विवरण नहीं दिया जाता, तब तक कै
राज्यमें किसानों को ट्रैक्टर और कृषि उपकरण बांटने के लिए कंपनियों के चयन में कृषि अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रख दिया है। करोड़ों रुपए की इस खरीदी में अधिकारियों ने वैसी कंपनियों/एजेंसियों की मशीनों को भी शॉर्ट लिस्ट कर लिया, जो मशीन खरीद के निर्धारित न्यूनतम मानकों को पूरा ही नहीं करतीं। कंपनियों के चयन में हुई गड़बड़ी को लेकर भूमि संरक्षण निदेशालय ने सरकार को रिपोर्ट भेजी है। इसमें कहा गया है कि कंपनियों का चयन नियमानुसार नहीं हुआ। पूरे मामले में पूर्व भूमि संरक्षण निदेशक राजीव कुमार पर अनियमितता और नियमों का पालन करने नहीं करने का आरोप है। निदेशालय की रिपोर्ट के बाद कृषि सचिव डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी ने राजीव कुमार से स्पष्टीकरण मांगा है। कंपनी चयन में उठे विवाद के बाद राज्य में किसानों को गुणवत्तायुक्त मशीन देने की योजना पर ही प्रश्नचिह्न लग गया है।
कंपनी मशीन (मॉडल)
एडिकोस्पेयर्सप्रा. लि. एडिको एसी-12 (पांच मॉडल)
बी मणिलाल एंड कंपनी केपीकेएन 2020
चेतका इंटरप्राइजेज यूएनके 2020ए
फार्मर हाउस डब्लूएसके 2020ए 3 मॉडल
गणपति डिस्ट्रीब्यूटर्स सीएस 37 अन्य चार मॉडल
जयशेर इक्यूपमेंट एफएम 55 अन्य दो मॉडल
कंपनीमशीन (मॉडल)
र|ागिरीइंपैक्स केएफ-1ए-22 अन्य सात मॉडल
शिवा ट्रेडिंग यूएनके 2020ए एक अन्य
साउदर्न एग्रो सी-12 एक अन्य मॉडल
उषा इंटरनेशनल यूएनके 2020ए
शिवा ट्रेडिंग 05सीवी2525एचएच पांच मॉडल
उषा इंटरनेशनल 05सीवी2525एचएच पांच मॉडल
राजीव कुमार, पूर्व भूमि संरक्षण निदेशक
राज्य में कृषि यांत्रिकीकरण योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में केंद्र और राज्य योजना से झारखंड के सभी 24 जिलों में अनुदानित दर पर किसानों के बीच कृषि यंत्र का वितरण किया जाना है। योजना के तहत किसानों को ट्रैक्टर, पंप सेट और अन्य उपकरण वितरित किए जाने हैं। भूमि संरक्षण निदेशालय ने उपकरणों की खरीदी के लिए 20 फरवरी 2015 को एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (पीआर- 122131) निकाला। जिसमें देश की कई कंपनियों को आमंत्रित किया गया। करीब 65 कंपनियां शामिल हुईं। इसमें से तकनीकी और फाइनेंशियल बीड के बाद 36 कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया। सफल कंपनियों के संबंध में भूमि संरक्षण निदेशालय की ओर से 2 सितंबर 2015 को आदेश (संख्या 997) निकाला गया। हालांकि तकनीकी कमेटी में शामिल अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन किया और निविदा शर्तों के विपरीत कई ऐसी कंपनियों और उसके उत्पादों को शॉर्ट लिस्ट किया, जो मानक पूरा नहीं करतीं।
निदेशालय की ओर से इच्छा की अभिव्यक्ति दो भागों में मांगी गई। पहला तकनीकी और दूसरा वित्तीय। तकनीकी रूप से सफल कंपनियों का ही वित्तीय बीड खोला जाना था। तकनीकी बीड में भूमि संरक्षण निदेशालय के कई अधिकारी शामिल थे। इन अधिकारियों ने कंपनियों की मशीनों की टेस्टिंग रिपोर्ट देखे बगैर ही उसे सफल कर दिया। बाद में इन कंपनियों का वित्तीय बीड भी खोल दिया गया और वे सफल घोषित कर दी गईं। अधिकारियों ने मशीनों के लिए निर्धारित की गई न्यूनतम अर्हता को भी नहीं देखा। यही कारण है कि 13 एजेंसियों की 43 मशीनों को सूचीबद्ध (इंपैनल) कर दिया गया।
एक ही टेंडर में दो आदेश निकाले गए
निदेशालयकी ओर से मशीनों की खरीदी के लिए एक टेंडर निकाला गया। हालांकि, मशीनों के इंपैनल के लिए दो आदेश निकाले गए। पहला आदेश ट्रैक्टर की खरीदी के लिए, जबकि दूसरा पंप सेट और अन्य यंत्रों के लिए निकाला गया। एक ही टेंडर में दो लिस्ट क्यों निकाली गई, यह भी संदेह के घेरे में है।
टेंडर पेपर के संख्या चार में क्रमांक 60 पर 1.95-बीएचपी से 5-बीएचपी तक के सिंचाई पंप और क्रमांक-61 पर एक से तीन किलोवाट तक इलेक्ट्रिक पंप की दर की मांग की गई थी। टेंडर में शामिल कंपनियों ने 1.5 बीएचपी को फाइनेंशियल बीड में 1.95 दिखाया और शॉर्ट लिस्टेड हो गईं। करीब तीन माह बाद बैक डेट से 13 कंपनियों की 43 मशीनों को हटा दिया गया। इसके लिए एक शुद्धि पत्र (1220) निकाला गया।
अफसरों के कारण किसानों की योजना शुरू होने से पहले ही विवादों में पड़ गई। किसानों को गुणवत्तायुक्त कृषि यंत्र वितरित किए जाने की योजना पर लगा प्रश्नचिह्न
कृषि उपकरण खरीदी के लिए कंपनियों के चयन में अफसरों ने किया गोलमाल
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