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15 सरकारी नौकरियां ठुकराईं, ताकि संवार सकें गरीब युवाओं का भविष्य

5 वर्ष पहले
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बैंकपीओ की नौकरी... ठुकरा दी। रेलवे की नौकरी... स्वीकार नहीं की। डाक विभाग नौकरी लेकर पहुंचा... कह दिया। नेशनल इंश्योरेंस असिस्टेंट का पद संभालने का ऑफर घर पर आया... उसे भी मना कर दिया। सरकारी हाई स्कूल में शिक्षक बनने का मौका मिला... नहीं कह दिया। झरिया (भागा) के सुमित के आगे सरकारी नौकरियां घुटने टेक रही हैं। उन्होंने 3 वर्षों में 15 सरकारी नौकरियों के ऑफर ठुकराए हैं। सवाल उठता है... ऐसा वे क्यों कर रहे हैं? आज जहां युवा सरकारी नौकरी के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं, वहां सुमित ने एक के बाद एक सरकारी नौकरियों के ऑफर क्यों ठुकरा दिए? इन सवालों का जवाब सुमित की ‘पाठशाला’ में पहुंच कर मिलता है। वे अपनी पाठशाला में गरीब छात्रों को बैंक पीओ और रेलवे सहित अन्य संस्थानों की बहाली परीक्षाओं में सफलता के टिप्स देते मिले। सुमित पिछले चार वर्षों से गरीब छात्रों को सरकारी नौकरी के लायक बनाने में जुटे हुए हैं। वे इसके लिए उनसे कोई फीस नहीं लेते हैं।

उन्होंने गरीब छात्रों को सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में सफल बनाने का खुद से वादा किया है। यह वादा अब उनकी जिद बन चुका है। सुमित अपनी इसी जिद को पूरा करने के लिए सरकारी नौकरियों के ऑफर ठुकरा रहे हैं। सुमित की इस जिद से 55 होनहार गरीब युवा सरकारी नौकरी में पहुंच सके हैं।

नौकरी करता, तो सिर्फ अपना भला होता...

सुमितने सरकारी नौकरियों की कुल 15 बहाली परीक्षाएं पास कीं। हर बार ऑफर लेटर घर पहुंचा, पर कहीं ज्वाइन नहीं किया। वे कहते हैं- सरकारी नौकरी में जाते ही बंध जाता। चाहकर भी गरीब बच्चों को सरकारी नौकरी के लायक नहीं बना पाता। मेरा मकसद दूसरों को नौकरी के काबिल बनाना था। अगर मैं नौकरी ज्वाइन करता, तो सिर्फ अपना भला कर पाता। मेरे नौकरी नहीं करने से कई गरीब युवाओं का भला हो रहा है।

सुमित में गरीब छात्रों को पढ़ाने की ललक थी। शुरुआत उन्होंने साल 2010 में अपनी कॉलोनी से की। चार-पांच युवाओं को बैंक पीओ की तैयारी कराना शुरू किया, तो घर से लेकर मुहल्ले तक में मजाक उड़ाया गया। सबने कहा कि जिसने खुद बैंक पीओ की बहाली परीक्षा पास नहीं की, वह दूसरों को सफल बनाने का दावा कर रहा है। सुमित कहते हैं- उन तानों ने मुझे झकझोर दिया। मैंने तय कर लिया कि पहले खुद बहाली परीक्षा पास करूंगा। फिर मैंने जमकर मेहनत की और तीन वर्षों में सात बार बैंक पीओ की बहाली परीक्षा पास की। आलोचकों को करारा जवाब मिल चुका है।

सुमित के पिता अनिल कुमार झा आरएसपी कॉलेज में बॉटनी के प्रोफेसर हैं। सुमित ने सरकारी स्कूल से शिक्षा पाई है। उन्होंने साल 2003 में 10वीं की परीक्षा पास की। वर्ष 2005 में झारखंड बोर्ड से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। आरएसपी कॉलेज से बीएससी (गणित) और विनायिका मिशन विवि से एमएससी की पढ़ाई की। रोहतक के एमडीयू से उन्होंने बीएड का कोर्स किया।

{ वर्ष 2012 में आईबीपीएस (नेशनल)

{ वर्ष 2012 में बिहार हाई स्कूल शिक्षक

{ वर्ष 2013 में आईबीपीएस (आरआरबी)

{ वर्ष 2013 रेलवे विलासपुर (एएसएम)

{ वर्ष 2013 में नेशनल इंश्योरेंस असिस्टेंट (नागपुर)

{ 2013 एसएससी (कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल)

{ वर्ष 2013 एसएससी (एलडीसी)

{ वर्ष 2013 में झारखंड टेट

{ वर्ष 2014 में आईबीपीएस (आरआरबी)

{ वर्ष 2014 में आईबीपीएस (नेशनल)

{ 2014 में पश्चिम बंगाल पोस्टल असिस्टेंट

{ वर्ष 2015 में आईबीपीएस (आरआरबी)

{ वर्ष 2015 में आईबीपीएस (नेशनल)

{ 2015 एसएससी (कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल)

{वर्ष 2012 में आईबीपीएस (आरआरबी)

बहाली परीक्षाओं के पैटर्न और सिलेबस में लगातार बदलाव होता रहता है। इस बदलाव को जानने, समझने और परखने के लिए ही सुमित लगातार उन परीक्षाओं में शामिल होते रहते हैं। वे कहते हैं- हर सफलता से उत्साह बढ़ता है। पता चलता है कि मैंने खुद को बदलावों के प्रति अपडेट रखा है। इससे मुझसे पढ़ने आनेवालों का मुझमें भरोसा बढ़ता है। जब तक परीक्षाएं देने की उम्र बची रहेगी, मैं उनमें शामिल होता रहूंगा।

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