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एसएसपी की गाड़ी रोक दी, ताज्जुब...

5 वर्ष पहले
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दस रुपए के लिए दिन में शहर में ट्रैक्टर के प्रवेश की इजाजत देनेवाले एसएसपी की गाड़ी को जांच के लिए रोक दे यह ताज्जुब की ही बात है। धनबाद अपराधियों का शहर ऐसे ही नहीं बन गया। यहां एक बड़ी आबादी पर ऐसे ही अपराध की संस्कृति हावी नहीं हो गई। उन्हें यह गुमान हो रहा है कि जो भी हैं वहीं हैं।...ही इज आल मायटी। अपराध की खुलेआम इजाजत देने का मतलब है कि हम आपकी अधीनता स्वीकार करते हैं। नतीजा है कि कोयलांचल के समाज पर अपराधियों और इस तरह की प्रवृत्ति वाले लोगों का ही बोलबाला है। नतीजा है कि समाज की कमान गलत तत्वों के हाथ में चली गई है। और जब तक अपराधियों का समाज में बोलबाला है, उनका धौंस है तो ऐसे समाज को सभ्य समाज नहीं कह सकते। धनबाद ऐसा ही एक शहर है जहां शरीफ लोग दबे कुचलों की तरह रहते हैं। वे सच और झूठ को जानते हैं। वे जानते हैं क्या होना चाहिए। वे इस समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं पर उन्हें हासिए पर डाल दिया गया है। दबंगों के इस जमाने में यहां की संस्कृति बदलना आसान तो नहीं पर कोई ठान ले तो फिर मंगलकामना ही कर सकते हैं। संक्षेप में यही कह सकते हैं कि प्रशासन को यहां दबंगों के लिए रास्ता छोड़ना ही पड़ता है। जांच के लिए ऐसे लोगों को रोका नहीं जाता। ऐसी यहां परंपरा नहीं है। {खबरची

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