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देशभर में छठे स्थान पर रही आईएसएम की फर्राटा कार

6 वर्ष पहले
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धनबाद। आईएसएम मेकेनिकल इंजीनियरिंग छात्रों की फार्मूला स्टाइल रेसिंग कार पूरे देश में धूम मचा चुकी है। आईएसएम छात्रों की इस कार को कोयम्बटूर में आयोजित करी मोटर स्पीड वे नेशनल इंवेंट में देश भर में छठा स्थान प्राप्त हुआ है।
इस प्रतियोगिता में देश भर के 76 संस्थाओं की कार हिस्सा लिया था। इस प्रतियोगिता में आईएसएम छात्रों की कार देश भर के सभी एनआईटी की कारों को पीछे छोड़ हुए छठा स्थान प्राप्त किया है।
यह प्रतियोगिता 22 से 25 जनवरी के बीच कोयम्बटूर में आयोजित की गई थी। आईएसएम छात्रों ने अपने इस कार का नाम मेचिस्मू रेसिंग दिया है। इस कार्य को आईएसएम मेकेनिकल इंजीनियरिंग के 25 छात्रों ने मिल कर तैयार किया है।

150 केएमपीएच की रफ्तार से फर्राटा भरती है यह खास कार

आईएसएम मेकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्रों की कार मेक्‍िसमम सामान्य तौर पर 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती है। इसके साथ ही कार एक लीटर पेट्रोल में छह किमी की दूरी तय करती है। छात्रों की यह कार 600 सीसी का है।
छात्रों की माने को रेसिंग कार में यह काफी मजबूत है। इसकी रफ्तार भी काफी अधिक है। इसके साथ ही रेस में हिस्सा लेने के लिए भी कार बहुत ही सुरक्षित है। इस कार की बॉडी ग्लास फाइबर से तैयार किया गया है।

आईएसएम में आयोजित सेमिनार के दौरान अपनी मेचिस्मू रेसिंग कार के साथ स्टूडेंट।

7 लाख रुपए में तैयार हुई है कार

आईएसएममैकेनिकल इंजीनियरिंग के कार निर्माण टीम के कैप्टन नितिन बंसल ने बताया कि इसे बनाने में 7 लाख रुपए खर्च हुए। इसमें पूर्ववर्ती छात्र संघ ने मदद की। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के जिन छात्रों की अच्छी कंपनी में नौकरी हो जाती है, तो वे भी 10 हजार रुपए की मदद करते हैं।

आईएसएम के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र फाॅर्मूला स्टूडेंट्स इंडिया के तहत वर्ष 2008 से ही रेसिंग कार का निर्माण कर रहे हैं। आईएसएम की कार ने वर्ष 2015 में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। हमारी कार को देश भर में छठा स्थान प्राप्त हुआ है, जो देश भर की एनआईटी से आगे है।\\'\\' पवनकुलकर्णी, पीआरओ, कार निर्माण टीम

यामाहा एफजेड आर 6 इंजन का प्रयोग

अाईएसएम स्टूडेंट की बनाई इस खास कार में यामहा एफजेड आर 6 इंजन लगाया गया है। यह इंजन काफी इंजन है। इस वजह से यह कार काफी तेज गति से चल सकती है। छात्रों ने बताया की कोयम्बटूर की रेस में कार को अधिकतम 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया गया।