धनबाद। वर्ष 2008 में हुए कृषि ऋण माफी घोटाले में नया पेंच फंस गया है। धनबाद के को-ऑपरेटिव बैंक और पैक्स 17 करोड़ रुपए के बजाए सिर्फ दो करोड़ रुपए ही लौटाने को तैयार हैं। मामले में बैंक और पैक्सों ने सीएजी की जांच रिपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया है।
उन्होंने राज्य सरकार के वित्त विभाग की ओर से मामले में हुई शुरुआती जांच को मानते हुए राशि लौटाने पर सहमति जताई है। वित्त विभाग की जांच में दो करोड़ रुपए की गड़बड़ी उजागर हुई थी। बैंक प्रबंधन की ओर से राज्य सरकार को रिपोर्ट भी भेज दी गई है। सरकार और नाबार्ड की ओर से आपत्ति नहीं होने पर राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
लोन माफी घोटाले की कई बार हो चुकी है जांच {सीएजी के बाद चार्टर्ड एकाउंटेंट की टीम ने भी की जांच
बाद में बैंक प्रबंधन स्तर से हुई त्रिस्तरीय जांच {राशि लौटाने के लिए नाबार्ड बना रहा है दबावमामले में फरार हैं सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के तत्कालीन एमडी
कई पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधकों की हो चुकी है मौत
केंद्र सरकार ने 2008 में कृषि ऋण माफी योजना लागू की थी। इसके तहत वर्ष 2007-08 में किसानों को दिया गया लोन माफ करना था। योजना के अनुसार, धनबाद सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की शाखाओं और धनबाद, बोकारो के पैक्सों की ओर से 34 करोड़ का क्लेम किया गया।
सरकार ने नोडल एजेंसी नाबार्ड के माध्यम से तत्काल 17 करोड़ रुपए बैंक और पैक्सों को दे दिए। इस बीच लोन माफी योजना में गड़बड़ी की शिकायत पर वित्त विभाग ने जांच शुरू की। शुरुआती जांच में गड़बड़ी का खुलासा होने पर शेष राशि रोक दी गई। इसके बाद मामले की जांच सीएजी से कराई गई। रिपोर्ट में 95 फीसदी मामलों में गड़बड़ी पाई गई। यह भी खुलासा हुआ है कि गैर कृषि लोन भी माफ कर दिए गए हैं।
लोन माफी योजना में गड़बड़ी उजागर होने के बाद धनबाद सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की आठ शाखाओं ने 50 लाख रुपए सरकार को लौटा दिए थे। लेकिन, धनबाद और बोकारो के 81 पैक्सों ने अब तक राशि नहीं लौटाई है। जिन शाखाओं ने राशि लौटायी है उनमें जिला परिषद, सरायढेला, टुंडी, पूर्वी टुंडी, जोड़ापोखर आदि शामिल हैं। इस पूरे मामले में पैक्सों की ओर से झारखंड उच्च न्यायालय में शिकायतवाद भी दर्ज कराई गई है।
^लोन माफी योजना से संबंधित रिपोर्ट झारखंड सरकार को भेज दी गई है। पैक्स वित्त विभाग की जांच को मानने के लिए तैयार हैं। सरकार और योजना की नोडल एजेंसी नाबार्ड को आपत्ति नहीं हुई, तो राशि लौटा दी जाएगी।’’ देवेंद्रसिंह, एमडी,दि धनबाद सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, धनबाद।