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अफसरों, माननीयों को बदलनी होगी सोच

7 वर्ष पहले
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स्मार्टसिटी का सपना स्मार्ट प्लानिंग और स्मार्ट सोच से ही पूरा होगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के जिन 100 शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए चुना है, उसमें धनबाद भी शामिल है। इसे स्मार्ट बनाने के लिए पहले स्मार्ट प्लानिंग करनी होगी। शासन, प्रशासन को अपनी सोच बदलनी होगी। जनप्रतिनिधियों को भी अपनी सोच और कार्यप्रणाली में बदलाव लाना होगा, तभी यह सपना साकार होगा।

गौरतलब है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में धनबाद का चयन मिलेनियम सिटी के रूप में किया गया था, लेकिन इसका हश्र किसी से छिपा नहीं है। घोषणा के 10 साल बाद भी मूलभूत समस्याएं तक दूर नहीं की जा सकी हैं। सालोंभर पानी, बिजली, सड़क की समस्या से लोग जूझते रहते हैं। सड़क जाम लाइलाज बीमारी बन चुकी है। सिटी डेवलपमेंट प्लान (सीडीपी) बना, लेकिन उस पर काम नहीं हुआ। कचरा निष्पादन की व्यवस्था नहीं है। अर्बन ट्रांसपोर्ट सिस्टम फेल हो चुका है। शहरी जलापूर्ति योजना भी पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाई है।





सबसे खराब स्थिति सीवेरज और ड्रेनेज सिस्टम की है। केंद्र की ओर से इन सभी कामों के लिए राशि आवंटित की जा चुकी है, लेकिन फिर भी काम नहीं हो रहा है।

> वार्डों में हो सफाई की बेहतर व्यवस्था

> जल निकासी का हो स्थायी समाधान

> विकास कार्यों में तेजी लाई जाए

> हाई वोल्टेज तार को हटाया जाए

> गली, मुहल्लों में स्ट्रीट लाइट लगाई जाएं

वार्डों का एजेंडा

{सड़क जाम का स्थायी समाधान

{ बैंकमोड़ में बने फ्लाईओवर

{ सड़कों की दशा सुधारी जाए

{ जल निकासी का बेहतर प्रबंधन

{ बने अत्याधुनिक हवाई अड्डा

{ जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार जरूरी

{ ठोस कचरा प्रबंधन का इंतजाम

{ शहर को अतिक्रमण मुक्त किया जाए

{ अर्बन ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर किया जाए

शहर का एजेंडा

^अपने वार्ड में सफाई और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था को लेकर कई बार निगम के अफसरों से मिल चुकी हूं। सफाई अभियान दो दिनों का था। फिर से वही स्थिति हो गई है। -लक्ष्मी देवी, वार्ड नंबर 21

^वार्डको गंदगी और हाई वोल्टेज तार से मुक्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। नगर आयुक्त और विद्युत महाप्रबंधक से भी मिल चुके हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा। -अशोक पाल, वार्ड नंबर 24

^गंदगीसबसे बड़ी समस्या है। महाअभियान में भी हमारे वार्ड की सफाई