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शहर में दौड़ेगी मोनो ट्रेन

6 वर्ष पहले
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धनबाद। धनबाद को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद नगर विकास विभाग ने शुरू कर दी है। फोकस ट्रैफिक व्यवस्था और अर्बन ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर है। शहर में सड़कों की स्थिति को देखते हुए मुंबई की तर्ज पर मोनो ट्रेन चलाने की योजना है।
इंटर बस सेवा (ई-बस सेवा) पर भी विचार किया जा रहा है। धनबाद के लिए मोनो ट्रेन और इंटर बस सेवा में से बेहतर क्या होगा, इसकी संभावना तलाशने की जिम्मेवारी एल एंड टी इन्फ्रा इंजीनियरिंग को सौंपी गई है। नगर विकास विभाग के रांची स्थित मुख्यालय में गुरुवार को इस संबंध में एमओयू किया गया। इस पर विभाग के शशिशेखर, धनबाद नगर निगम के नगर आयुक्त सिद्धार्थ शंकर चौधरी और कंपनी के एक वरीय अधिकारी ने हस्ताक्षर किए। कंपनी को वर्क आर्डर भी दे दिया गया है।

70 लाख रुपए खर्च होंगे कंप्रहेंसिव मोबिलिटी प्लान पर

09 महीने में नगर विकास विभाग को सौंपना है प्लान

10लाख की आबादी वाले शहरों में अर्बन ट्रांसपोर्ट सिस्टम

एल एंड टी इन्फ्रा इंजीनियरिंग को कंप्रहेंसिव मोबिलिटी प्लान (सीएमपी) नौ माह में विभाग को सौंप देना है। इस पर करीब 70 लाख खर्च होंगे। कंपनी के एक अधिकारी ने निगम के अफसरों के साथ बैठक कर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति की जानकारी ली। सर्वे में कंपनी के प्रतिनिधि यह भी पता लगाने की कोशिश करेंगे कि जेएनएनयूआरएम के तहत शुरू की गई सिटी बस सेवा क्यों नाकाम हो गई।

सर्वे के दौरान सड़कों पर भी कंपनी का फोकस रहेगा। सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम की गड़बड़ी से सड़क पर पानी बहता है, इसे रोकने के लिए उपाय भी कंपनी ढूंढेगी। अधिक आबादी वाले क्षेत्र में टिकाऊ सड़क के निर्माण पर भी विशेष फोकस रहेगा।

सीएमपी बनने के बाद राज्य सरकार को केंद्र सरकार से अर्बन ट्रांसपोर्ट सिस्टम लागू करने के लिए अलग से फंड मिलेगा। एक शहर के लिए कम-से-कम 500 बसें मिलने की संभावना है। इसके अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए भी फंड मिलेगा।

इसलिए है जरूरी : शहरी परिवहन योजना तैयार करने से पहले किसी भी शहर का सीएमपी तैयार करना जरूरी है। इसके आधार पर ही भारत सरकार की ओर से शहरी परिवहन योजना को स्वीकृति दी जाएगी और फंड दिया जाएगा। केंद्रने 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में अर्बन ट्रांसपोर्ट सिस्टम को लागू करना अनिवार्य कर दिया है, ताकि निजी वाहनों का प्रयोग कम हो सके।

क्या है ई-बस सेवा

ई-बस सेवा आम बस सेवा से अगल होगी। इसका संचालन जीपीएस सिस्टम से होगा। सभी बसों में एसी लगी होगी और वे जीपीएस से जुड़ी रहेंगी। बेहतर संचालन के लिए कंट्रोल रूम बनेगा। यात्रियों को इन बसों में सफर करने के लिए बुकिंग काउंटर से टिकट लेने होंगे। बसके रूट के साथ स्टॉपेज भी निर्धारित रहेंगे। चालक के पास वॉकी-टॉकी रहेगी। यह बस सेवा निगम के पांचों अंचलों में हाेगी।

क्या है मोनो रेल

मोनोरेल उस तकनीक का नाम है, जिसमें ब्रिज के ऊपर-ऊपर ही ट्रेनों का परिचालन किया जाता है। मुंबई में इसका सफल परिचालन हो रहा है। इसके लिए ओवरब्रिज का निर्माण कर उसपर विशेष पटरियां बिछाई जाती हैं। ट्रेन की बोगियां भी विशेष किस्म की होती हैं। मुंबईमें मोनो रेल बिछाने में 3 हजार करोड़ की लागत आई थी। ट्रेन की औसत गति 32 किमी और अधिकतम 80 किमी/घंटा है।

क्या है सीएमपी

शहरी परिवहन व्यवस्था के विकास की विस्तृत कार्य योजना ही कंप्रहेंसिव मोबिलिटी प्लान (सीएमपी) है। इसमें सड़क की चौड़ाई, बसों की संख्या, बस स्टैंड का डिजाइन, रोड मार्किंग, बसों के रूट आदि तय किए जाते हैं। साथ ही रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैंड से यात्रियों को कवर करने के लिए बस की फ्रिक्वेंसी तय की जाती है, ताकि बाहर से आने वाले यात्रियों को हमेशा बस की सुविधा मिल सके।

^कंप्रहेंसिव मोबिलिटी प्लान के तहत एल एंड टी कंपनी के साथ एमओयू हुआ है। वर्क आर्डर भी दे दिया गया है। कंपनी धनबाद में अर्बन ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने और शहर में मोनो ट्रेन तथा ई-बस सेवा के परिचालन की संभावनाएं तलाशेगी। कंपनी को इसके लिए नौ माह का समय दिया गया है।’’ -सिद्धार्थ शंकर चौधरी, नगर आयुक्त, धनबाद नगर निगम।