संबंधन में फिर फंसा विभावि प्रशासन
विभाविहजारीबाग एक बार फिर बीएड कॉलेजों को संबंधन जारी करने में फंसा है। विवि ने जुलाई 2013 में दो दर्जन से अधिक बीएड कॉलेजों को एक से तीन सत्र का नव संबंधन, संबंधन और स्थायी संबंधन दिया था। संबंधन का पत्र कॉलेजों को जारी करते हुए मानव संसाधन विकास विभाग को घटनोत्तर स्वीकृति के लिए भेजा था। विभावि ने जिन्हें तीन साल का संबंधन जारी किया था। विभाग ने मात्र एक सत्र 2013-14 के संबंधन को स्वीकृति दिया है। कॉलेजों ने विभावि से मिले संबंधन पत्र के आधार पर सत्र 14-15 में नामांकन लेकर उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षुओं का सत्र पूूरा होने पर एक बार फिर विवाद पैदा होगा। विवि इनकी परीक्षा रोक सकता है। संबंधन के पत्र को आधार बनाकर एक बार फिर कोर्ट पहुंचेंगे। विभावि ने एचआरडी से स्वीकृत होकर आए कॉलेजों की सूची विवि की वेबसाइट पर जारी कर दिया है।
पूर्व में जारी संबंधन में संशोधन या रद्द नहीं किया गया है। इधर, एचआरडी से आए पत्र का असर दिखने लगा है। सत्र 2013-14 का परीक्षा प्रपत्र भरने की अतिम तिथि छह फरवरी निर्धारित किया गया था। उक्त सत्र में भी कई कॉलेजों को परीक्षा प्रपत्र ही नहीं दिया गया।
अनुमोदन के बगैर क्यों जारी हुआ संबंधन
बीएडकॉलजों के अनियमित सत्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जून 2013 में नए कॉलजों के आवेदन करने की तिथि, संबंधन जारी की तिथि निर्धारित कर दिया था। मानव संसाधन विकास विभाग झारखंड ने इसी आदेश के आलोक में सभी विवि को बीएड कॉलेजों की जांच कर निर्धारित टाइम फ्रेम में कॉलेजों को संबंधन जारी करने का निर्देश दिया। टाइम फ्रेम के भीतर संबंधन जारी करने के लिए एचआरडी ने विवि को संबंधन जारी करते हुए घटनोत्तर स्वीकृति की अनुशंसा भेजने को कहा था। विभावि ने कॉलेजों को संबंधन जारी करते हुए एचआरडी को अनुशंसा 2013 में ही भेज दिया था।
दिया गया था संबंधन
^कमसमय में संबंधन देने का निर्देश एचआरडी ने दिया था। विभावि के स्थानीय निकायों से संबंधन की अनुसंशा पर स्वीकृति लेने के बाद एचआरडी को घटनोत्तर स्वीकृति के लिए भेजा गया था। घटनोत्तर स्वीकृति में एचआरडी ने एक सत्र का संबंधन दिया।’’ डॉएसपी सिन्हा, रजिस्ट्रार, विभावि