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कोर्ट परिसर में वेंडरों की दुकानें।

6 वर्ष पहले
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धनबादमें स्टांप पेपर की कालाबाजारी जोरों पर है। पिछले कई माह से कोर्ट परिसर में 5 से 20 रुपए तक के स्टांप पेपर नहीं मिल रहे। किसी की जरूरत भले ही 2, 5, 10 या 20 रुपए के स्टांप पेपर की हो, उसे 50 रुपए, 100 रुपए या उससे अधिक मूल्य के स्टांप पेपर ही खरीदने पड़ रहे हैं। 50 रुपए वाले स्टांप पेपर भी दोगुना मूल्य में बेचे जा रहे हैं। इस कालाबाजारी में वेंडर से लेकर अफसर तक शामिल हैं। जहां स्टांप बेचने वाले अधिक मूल्य वसूल कर हर माह लाखों की कमाई कर रहे हैं, वहीं अफसर सब जानते-समझते हुए भी इसे रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहे। जिला कोषागार अधिकारी तो यह मानने को भी तैयार नहीं हैं कि स्टांप पेपर की कालाबाजारी हो रही है। वहीं, कैबिनेट की स्वीकृति के बावजूद दो साल में फ्रैंकिंग मशीन नहीं लगाई गई है। अगर यह मशीन लग जाती, तो लोगों को वेंडरों की मनमानी से राहत मिल सकती है। डीबी स्टार को स्टांप पेपर की कालाबाजारी की लगातार शिकायत मिल रही थी। मामले की पड़ताल करने डीबी स्टार की टीम धनबाद कोर्ट परिसर पहुंची। वहां कई वेंडरों से कम मूल्य के स्टांप पेपर की मांग की गई। कई वेंडरों ने 2, 5, 10, 20 और 50 रुपए मूल्य के स्टांप पेपर देने से साफ मना कर दिया। कुछ 50 रुपए वाला स्टांप पेपर देने के लिए तैयार हुए, पर उन्होंने दोगुनी कीमत मांगी। छानबीन में पता चला कि स्टांप पेपर की कालाबाजारी का यह गोरखधंधा हर महीने लाखों रुपए का है। इसका लगभग आधा हिस्सा तो सरकार के खाते में जाता है, लेकिन बाकी की राशि कालाबाजारी करनेवाले वेंडरों और अफसरों में बंट जाता है। इस गोरखधंधे से सीनियर अफसर भी वाकिफ हैं, फिर भी वे कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। जिला कोषागार अधिकारी कहते हैं कि कम मूल्य के स्टांप पेपर की कमी है, जबकि धनबाद में उनकी ही ज्यादा मांग है।

रद्द किया जाएगा लाइसेंस

विजय मोहन प्रसाद, जिलाकोषागार अधिकारी

सीधी बात

~100 में बिक रहा 50 रुपए वाला स्टांप पेपर

गोरखधंधा | धनबाद कोर्ट परिसर में हो रही स्टांप पेपर की कालाबाजारी, सब जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहे अधिकारी