धनबाद. झारखंड के इकलौते सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्राओं को कॉमन रूम में चटाई पर सोना पड़ रहा है। उन्हें संस्थान की ओर से हॉस्टल उपलब्ध कराया गया और ही बेड। यह हाल है बीआईटी सिंदरी में सत्र 2014-15 में दाखिला लेनेवाली 16 छात्राओं का। संस्थान में उन्हें दाखिला तो मिल गया, पर उनके रहने का ठीक इंतजाम नहीं किया गया। फर्स्ट इयर की जिन छात्राओं को हॉस्टल में जगह मिली भी, तो उन्हें वहां भेड़-बकरियों की तरह कमरों में ठूंस दिया गया।
नियम एक कमरे में अधिकतम तीन छात्राओं को रखने का है, पर यहां पांच-छह छात्राओं के एक ही कमरे में रहने के लिए मजबूर किया गया है। कई छात्राएं फिर भी बच गईं, तो उन्हें कॉमन रूम में डाल दिया गया। उन्हें बेड भी नहीं दिया गया।
इस सत्र में छात्राओं की संख्या बढ़ गई है। इस वजह से एक ही हॉस्टल में उन्हें रख पाना मुश्किल है। संस्थान की छात्राओं को कैंपस के बाहर नहीं रखा जा सकता है। इसलिए मजबूरी में उन्हें कॉमन रूम में ही जगह दे दी गई है। - प्रोआरएन गुप्ता, वार्डन,गर्ल्स हॉस्टल, बीआईटी सिंदरी
बीआईटी में छात्राओं के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने 100 बेड का हॉस्टल स्वीकृत किया है। हालांकि अब तक राशि नहीं दी गई है। गर्ल्स हॉस्टल का योजना अभी तक विभाग की फाइलों में ही है।
फाइलों में गर्ल्स हॉस्टल -हॉस्टलों की स्थिति खराब
10
300
करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। पर पांच साल बाद भी हॉस्टल का निर्माण शुरू नहीं किया गया।
कमरों के हॉस्टल की स्वीकृति दी गई थी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से बीआईटी सिंदरी में वर्ष 2009 में
पांच साल में भी नहीं बना 300 कमरों का हॉस्टल
संस्थान के सभी हॉस्टलों की स्थिति खराब हो गई है। कमरों के दरवाजे और उनकी खिड़कियां जर्जर हाे चुकी हैं। कई कमरों के दरवाजे तो टूट गए हैं। गर्ल्स हॉस्टल के कई कमरों में दरवाजों की जगह सिर्फ पर्दे लगे हुए रहते हैं।
छात्राओं के लिए संस्थान में 20, 21 और 25 नंबर हॉस्टल उपलब्ध हैं। हर हॉस्टल में 27 कमरे हैं। इनमें से तीन-चार कमरे गार्ड और अन्य के लिए रिजर्व रहते हैं। छात्राओं के लिए 23-24 कमरे बचते हैं। इस तरह एक हॉस्टल में नियमत: अधिकतम 75 छात्राएं रखी जा सकती हैं, लेकिन 120 छात्राओं को उतने ही कमरों में रहने को मजबूर किया गया।