महालया आज, 25 को होगी कलश स्थापना
महालयाके साथ ही पितृपक्ष का समापन और देव पक्ष की शुरुआत होगी। इसी के साथ देवी दुर्गा की आराधना का महापर्व नवरात्र भी शुरू हो जाएगा। इस बार महालया को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोगों के अनुसार मंगलवार को ही महालया है, जबकि अन्य लोगों का कहना है कि बुधवार को महालया मनाया जाएगा। उसी दिन पितृपक्ष का अंतिम दिन है, लेकिन ज्योतिषों की मानें तो इस बार महालया मंगलवार को ही है। काशी और बांग्ला पंचांग में भी मंगलवार को ही महालया बताया गया है। ज्योतिषों के अनुसार सर्व पितृ अमावस्या मंगलवार को सुबह 9 बजकर 22 मिनट से शुरू हो रहा है, जो अगले दिन पूर्वाह्न 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगा। उसके बाद प्रतिपदा शुरू हो जाएगी। शास्त्र के अनुसार सर्व पितृ अमावस्या के दिन ही महालया मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि पितृ अमावस्या के दिन ही देवी दुर्गा धरती लोक के लिए प्रस्थान कर जाती है।
महालया मंगलवार को होने के कारण इसी दिन देवी का आह्वान किया जाएगा। बंगाली समाज इसे उत्सव के रूप में मनाता है।
नौ रूपों की स्तुति
अमावस्या और प्रतिपदा के कारण आया अंतर
महालयामंगलवार को है, लेकिन नवरात्र की शुरुआत गुरुवार से हो रही है। पंडित आशुतोष तिवारी के अनुसार आमतौर पर महालया के दूसरे दिन ही कलश स्थापना होती है, लेकिन इस बार कलश स्थापना एक दिन बाद होगी। इसका कारण अमावस्या और प्रतिपदा है। अमावस्या बुधवार को पूर्वाह्न 11 बजकर 06 मिनट पर समाप्त हो रहा है। उसके बाद प्रतिपदा शुरू हो रही है। बुधवार को प्रतिपदा सूर्योदय के बाद लग रहा है, जबकि कलश स्थापन उदयातिथि में ही होती है।
बुधवार को अगर अमावस्या रात 12 बजे समाप्त होता, तो नवरात्र की मान्यता बुधवार को ही होती, लेकिन अमावस्या बुधवार को पूर्वाह्न 11 बजे के बाद समाप्त हो रहा है, इसलिए उस दिन कलश स्थापना नहीं हो सकती। कलश स्थापना उदयातिथि में ही होती है, इसलिए गुरुवार को ही कलश की स्थापना की जाएगी।
हीरापुर हरि मंदिर के पुजारी पंडित गौरचंद गांगुली के अनुसार महालया के दिन देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। मां की आराधना मंगलवार को ही की जाएगी, क्योंकि बांग्ला पंचांग में भी अमावस्या कल ही बताया गया है। पितरों के तर्पण का कल अंतिम दिन है। देवी के आह्वान के पूर्व नव पत्रिका का पूजन किया जाता है। उसके बाद केला, बेल, धान, बेदाना समेत अ