पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • दुनियाकी सबसे बड़

दुनियाकी सबसे बड़

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
रिश्तेदार भी नहीं आते | इन24 क्वार्टरों में रहनेवाले कर्मियों ने बताया कि रिश्तेदार भी अब उनके यहां आना बंद कर चुके हैं। जो आते भी है, तो यहां घंटा-दो घंटा से ज्यादा रुकने को तैयार नही होते। कॉलोनी के किसी खुशकिस्मत के बाल-बच्चों की शादी ठीक भी हो जाए, तो वे कहीं और जाकर शादी करते हैं।

बनीरहती है हादसे की आशंका | कॉलोनीके लोग शौचालय के रूप में गया पुल से होकर गुजरने वाली धनबाद-गोमो रेल लाइन का इस्तेमाल करते हैं। महिलाएं और बच्चों को मजबूरी में वहीं जाना पड़ता है। ऐसे में हमेशा हादसे की आशंका
दुनियाकी सबसे बड़ी नियोक्ता भारतीय रेलवे की न्यू मटकुरिया कॉलोनी में बारात नहीं आती। कोई अपनी बेटी भी इस कॉलोनी में नहीं ब्याहना चाहता। लड़कों की उम्र निकली जा रही है, पर ब्याह ठीक नहीं हो रहा। करीब दो दशकों में इस कॉलोनी में शायद की कोई शादी हुई हो। इसकी वजह यह है कि यहां रहनेवालों कर्मियों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। जंक्शन से चंद कदमों की दूरी पर स्थित इस कॉलोनी के 24 क्वार्टरों में रहनेवाले कर्मियों का पूरा परिवार इस 21वीं सदी में भी नित्यक्रिया से निबटने के लिए रेलवे ट्रैक का इस्तेमाल करने को मजबूर है।

देश के दूसरे सबसे अधिक राजस्व देनेवाले धनबाद रेल मंडल की न्यू मटकुरिया कॉलोनी के ये क्वार्टर रेलवे के चतुर्थ वर्गीय सफाईकर्मियों को अलॉट किए गए हैं। इन क्वार्टरों का निर्माण करीब पांच दशक पहले कराया गया था। तब वहां साथ ही सार्वजनिक शौचालय भी बनाया गया था, लेकिन 25 साल पहले ही शौचालय और उसकी टंकी ध्वस्त हो गई। कर्मियों की बार-बार की शिकायतों के बावजूद रेलवे के अफसरों ने उस शौचालय की मरम्मत कराई और ही उसकी जगह नया शौचालय बनवाया। जो कर्मी रेलवे की सफाई का जिम्मा संभालते हैं, रेलवे को उनकी साफ-सफाई का ही ख्याल नहीं है।

अफसर और नेता नहीं देते ध्यान

प्रधानमंत्री की अपील का असर नहीं

अब यहां नहीं आती है बारात

{न्यू मटकुरिया रेलवे कॉलोनी के 24 क्वार्टरों में नहीं है शौचालय, 25 वर्षों से रेलवे ट्रैक का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं सफाईकर्मियों के परिवार