धनबाद. आठ माह से स्टाइपेंड का भुगतान नहीं होने से नाराज पीएमसीएच की सभी 96 नर्सिंग स्टूडेंट्स यानी जीएनएम शनिवार से हड़ताल पर चली गईं। उन्होंने सुबह से ही पीएमसीएच के मेन गेट पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी भी की। उन्होंने अधीक्षक डॉ के विश्वास को अस्पताल के मेन गेट पर रोक दिया। उन्हें अपने दफ्तर जाने के लिए रास्ता बदलना पड़ा।
जीएनएम की हड़ताल से पीएमसीएच की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं। इलाज के लिए पीएमसीएच में भर्ती मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि तीन दौर की वार्ता के बाद सभी जीएनएम शाम में काम पर लौट गईं। उन्हें आश्वासन दिया गया कि बुधवार तक आवंटन जाएगा। इसके बाद बकाए का भुगतान कर दिया जाएगा।
मरीजों की स्थिति हुई खराब
कर्मियों की घोर कमी झेल रहे पीएमसीएच में मरीजों के देखरेख जीएनएम के भरोसे ही है। पढ़ाई के साथ-साथ वे मरीजों की देखरेख भी करती हैं। उनके हड़ताल पर जाने से मरीजों की स्थिति काफी खराब हो गई। डॉक्टरों ने दवाएं तो लिखीं, पर दवाएं देने वाला कोई नहीं था। स्टाफ नर्सों से मरीज संभाले नहीं संभल रहे थे।
एक नर्स के भरोसे आईसीयू-एचडीयू
जीएनएमकी हड़ताल के कारण पीएमसीएच की आईसीयू और एचडीयू भी दिनभर एक स्टाफ नर्स के भरोसे रहीं। मरीजों की देखरेख से लेकर दवाई-इंजेक्शन तक एक ही नर्स भाग-भाग कर दोनों वार्डों में करती रही। दोनों वार्डों में सामान्य दिनों में एक-एक स्टाफ नर्स के अलावा तीन-तीन जीएनएम हमेशा तैनात रहती हैं।
पेडिएट्रिकविभाग में भी सिर्फ एक नर्स
पेडिएट्रिकडिपार्टमेंट भी बदहाल रहा। यहां एक स्टाफ नर्स के साथ तीन-चार जीएनएम तैनात की जाती हैं। यहां विभिन्न वार्डों में कुल 16 बच्चे एडमिट थे। हड़ताल के कारण सिर्फ एक स्टाफ नर्स ही वहां थी।
विकल्प भी काम नहीं आया
अस्पताल प्रबंधन ने हड़ताल के मद्देनजर वैकल्पिक व्यवस्था करने का दावा किया था। एएनएम स्कूल की स्टूडेंट्स से काम कराने के दावे के बावजूद वे गायनी को छोड़ किसी अन्य वार्ड में नहीं दिखीं।
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर गायनोकोलॉजी डिपार्टमेंट पर पड़ा। इसके वार्ड में हमेशा मरीजों का आना-जाना लगा रहता है। हड़ताल के कारण लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में परेशानी काफी बढ़ गई। आम तौर पर यहां दो स्टाफ नर्स के अलावा हमेशा चार-पांच जीएनएम होती हैं,