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कुड़मी को जनजाति का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन जरूरी : शैलेंद्र

7 वर्ष पहले
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न्यू टाउन हॉल में शनिवार को कुड़मी विकास मोर्चा के तत्वावधान में कुड़मी महासम्मेलन का आयोजन किया गया। अध्यक्षता मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव सह पार्षद गणपत महतो ने की, जबकि संचालन महादेव महतो एवं डॉ राकेश कुमार महतो ने किया। इस सम्मेलन के केन्द्र में कुड़मी जाति को अनुसूचित जाति जनजाति में शामिल करने की मांग की।

पूर्व सांसद शैलेन्द्र महतो ने कहा कि टोटेमिक कुड़मी जाति जनजाति है। इसकी भाषा और संस्कृति भी जनजाति से मिलती है। समाज के लोगों को संगठित कर आंदोलन करने के बाद ही इस जाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलेगा। विधायक जगरनाथ महतो ने कहा कि यह सरकार कुड़मी जाति को जनजाति का दर्जा नहीं देगी। इसके लिए आर्थिक नाकेबंदी और रेल रोको जैसे आंदोलन करने होंगे। पूर्व विधायक शिवा महतो ने कहा कि हम अपने हक और अधिकार के लिए लड़ेंगे। मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष शीतल ओस्दार ने कहा कि कुड़मी जाति को आदिवासी की सूची में शामिल करने के लिए धारदार आंदोलन करने की जरूरत है। महासचिव गणपत महतो ने इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि कुड़मी जनजाति थी, है और रहेगी।



पुन: जनजाति का दर्जा पाने के लिए जोरदार आंदोलन की जरूरत है। मौके पर सुधीर कुमार महतो, शरत महतो, विश्वजीत महतो समेत कई अन्य लोग मौजूद थे।

सम्मेलन में पारित प्रस्ताव

>टोटेमिककुड़मी जनजाति थी। केन्द्र और राज्य सरकार को इसे अनुसूचित जनजाति का दर्जा देना होगा। > कुड़माली भाषा काे झारखंड की राजभाषा बनाई जाए और इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। > दहेज प्रथा, नशाखोरी जैसी कुड़मी समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने के लिए पहल की जाए और कुड़मी नामधारी सभी संगठनों को विलय कर सर्वसम्मति से एक संगठन बनाया जाए। > कुड़मी समाज अपने सभी कार्यक्रम झारखंड कुड़माली रीति-रिवाज से करे। > कुड़माली भाषा की पढ़ाई-लिखाई प्राथमिक स्तर से किया जाए। इसके लिए शिक्षकों की बहाली की जाए। > झारखंड सरकार की स्थानीय नीति 1932 को आधार पर बनाया जाए और सभी बहाली स्थानीय नीति के आधार पर की जाए।

न्यू टाउन हॉल में कुड़मी महासम्मेलन में मौजूद सदस्य।