रोज-रोजबच्चों को ट
बच्चों के टिफिन में यह हो सकता है
{पराठा,टमाटर की चटनी, एक फल
{ वेज उपमा, दही, चटनी, सूप का कोई प्रोडक्ट
{ वेज नूडल्स, फल और मिठाई
{ आलू का पराठा, गाजर का हलवा, हरी चटनी और फल
रोज-रोजबच्चों को टिफिन देना मम्मियों के लिए सिरदर्द से कम नहीं होता है। वे इस बात पर परेशान रहती हैं कि खाना किस तरह से दें कि बच्चों को कोई नुकसान हो और उन्हें उचित पोषण भी मिल पाए। बच्चे अक्सर ही टिफिन में रखे खाने की चीजों को देखकर ना-नुकुर करते हैं। इसकी एक वजह होती है लंच टाइम तक खाना ठंडा हो जाना। इस वजह से माएं अक्सर बच्चों के टिफिन में गर्म खाना दे देती हैं। एक अध्ययन के मुताबिक स्कूली बच्चों के टिफिन में अधिक गर्म खाना देना नुकसानदेह हो सकता है। इसके बावजूद 60 प्रतिशत बच्चों को टिफिन में गर्म खाना ही दिया जाता है। यह किस तरह बच्चों को नुकसान पहुंचा सकता है और बच्चों को टिफिन में किस तरह खाना देना चाहिए, इस बारे में विस्तार से बता रही हैं डायटीशियन मधुमाला।
सिंगल मैन्यू हो
डायटीशियन का मानना है कि पैरेंट्स गर्म खाना किस चीज में पैक कर रहे हैं, यह देखना बेहद जरूरी है। फूड बेस्ड प्लास्टिक में टिफिन पैक किया जाना चाहिए। कलर प्लास्टिक पूरी तरह से अवाॅयड करना ही स्वास्थ्य के लिए श्रेयस्कर होगा। अगर प्लास्टिक कंटेनर यूज भी किया जाता है, तो उच्च गुणवत्ता वाला होना जरूरी है।
बनाएं पांच फूड ग्रुप
बच्चों के टिफिन को पांच ग्रुप में बांटा जा सकता है - दूध या उससे बने प्रोडक्ट्स, दाल, फल या सब्जी और गेंहू-सब्जी ग्रुप। डायटीशियन मधुमाला कहती हैं कि रोज सब्जी-पराठा बच्चों की पौष्टिकता की जरूरतें पूरा नहीं कर पाते हैं।
शहर के कुछ ही स्कूल ऐसे हैं, जहां डाइनिंग हॉल हैं और जहां बच्चों को लंच प्रोवाइड किया जाता है। इसके विपरीत ज्यादातर स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चे टिफिन लेकर जाते हैं। ज्यादातर बच्चे गर्म खाना टिफिन में लेकर जाते हैं। बहुत सारे बच्चे ऐसे भी होते हैं, जो एल्यूमिनियम फाॅयल या एयर टाइट कंटेनर में खाना लाते हैं। हालांकि बहुत ज्यादा गर्म खाना उनकी सेहत के लिए सही नहीं माना जाता है। कई बच्चे अनहेल्दी और फ्राइड खाना भी लेकर आते हैं। पराठा, पूरी या फिर चाउमीन और पास्ता जैसी चीजें टिफिन में लेकर आते हैं। इनसे उनकी न्यूट्रीशन संबंधी जरूरतें पूरी नहीं होती हैं। हालांकि आजकल कई सारे स्कूल ऐसे हैं, जहां होममेड फूड लाने पर जोर दिया जाता है और अनहेल्दी फूड खाने से मना किया जाता है। इन स्कूलों की टीचर खाने के समय बच्चों के सामने ही रहती हैं। ऐसे में बच्चे अपनी टीचर