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बेसिल ने छीना बेऔलाद दंपती के बुढ़ापे का सहारा
बेसिलकंपनी ने बेऔलाद दंपती से उनके बुढ़ापे का सहारा छीन लिया है। पैसा गया सो गया, चिंता में बिस्तर ही पकड़ लिया। एक सप्ताह से अस्पताल के बेड पर पड़े हैं गणेश महतो। उन्हें लकवा मार गया। गणेश पुटकी थाना क्षेत्र की कच्छी बलिहारी बस्ती के रहने वाले हैं। बीसीसीएल की कच्छी बलिहारी हाइड्रो माइनिंग छह नंबर पिट में टालवान के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2008 में रिटायर हुए। रिटायरमेंट के बाद चिंता थी कि आगे पति-प|ी का गुजारा कैसे चलेगा। भविष्य की चिंता के बीच एक रिश्तेदार एजेंट ने बेसिल कंपनी की स्कीम में पैसा लगाने की सलाह दी। अच्छा रिटर्न मिलने का सब्जबाग दिखाया। गणेश इसमें फंस गए और वर्ष 2009 में रिटायरमेंट के बाद मिले पैसे में से करीब 2.25 लाख रुपए बेसिल में इन्वेस्ट कर दिए।
सब खतम भय गेलो
गणेशकी प|ी मलिया देवी कहती हैं, सब खतम भय गेलो कंपनी में पैसा लागाय के। पति ने सोचा था कि बेसिल से मिलने वाले मासिक ब्याज से घर-परिवार चलता रहेगा। रिश्तेदार एजेंट परसबनिया, सिंदरी निवासी महावीर महतो ने कहा था कि मैच्योरिटी तक हर माह अच्छा ब्याज मिलता रहेगा। हर माह का कूपन भी मिला था। कुछ माह तक ब्याज मिला, पर फिर कंपनी के धनबाद ऑफिस में ताला लग गया। पति ने काफी भागदौड़ की, पर सब बेकार। एजेंट कहता रहा कि कुछ दिन इंतजार करो, सब ठीक हो जाएगा। इस बीच पति परेशान रहने लगे और उनकी तबीयत खराब हो गई। कई डॉक्टरों से इलाज कराया। इसमें भी काफी पैसा खर्च हो गया। डॉक्टरों का कहना था कि किसी सदमे के कारण इनकी ये हालत है। तीन फरवरी को पति को लकवा मार गया। अब किसी तरह रिश्तेदारों की मदद से इलाज कराया जा रहा है। कंपनी के धाेखे ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा। आगे कैसे गुजारा चलेगा, समझ में नहीं आता।
केस लड़ें या पति का इलाज कराएं
कंपनीके धोखे की शिकार दंपती पुलिस के पास भी नहीं गई। पूछने पर मलिया देवी ने बताया कि केस-मुकदमा के पीछे भागदौड़ काैन करेगा? पैसे भी खर्च होंगे। बीमार पति का इलाज ही काफी मुश्किल से हो पा रहा है। केस कर के परेशानी और बढ़ेगी ही। केस करेंगे तो कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाना होगा। इसलिए केस नहीं किया।
बेसिल में निवेश के कागजात दिखातीं गणेश महतो की परिजन।