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एक युवक जागा और चकाचक हुई बरटांड़ की सड़क
बरटांड़का बेहद पॉश इलाका माने जाने वाले पंडित क्लिनिक रोड की पहचान गंदगी और कचड़ा बन गया था। जिधर देखिए, उधर कूड़ा-करकट का अंबार। सड़कों तक में नालियों का पानी बहता था। उस सड़क से चमचमाती कारें गुजरती थीं। बेहद रसूखदार लोग रहते हैं उस इलाके में। इसके बावजूद कभी किसी की तंद्रा नहीं टूटी कि गंदगी को ठिकाने लगाया जा जाए। इसी बीच उसी इलाके में रहने वाले एक युवक संतोष चौरसिया उर्फ कल्लू की कानों में एक बुजुर्ग की लानत पिघले शीशे की तरह पड़ी। बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले और बरटांड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के सह सचिव संतोष का इलाकाई अहम जाग उठा। उसने सोचा-हाथ में हाथ धरे बैठने से कुछ नहीं होगा। सरकारी व्यवस्था काम नहीं करेगी तो निजी व्यवस्था को लागू करना ही श्रेयस्कर होगा। फिर क्या था! यह जुनूनी युवक ने खुद फावड़ा थाम लिया। कुछ अन्य साथियों का साथ मिला। उसके बाद उन्होंने गंदगी के खिलाफ जो नया सिस्टम लागू किया, वह उस इलाके में आमूलचूल परिवर्तन लाने में ब्रह्मास्त्र साबित हुआ। आज इलाका चकचक है। लोगों की दैनिक दिनचर्या की शुरुआत साफ-सफाई से होती है।
हाउसिंग कॉलोनी के लोगों ने सफाई में मांगी मदद
संतोषउनके साथियों की मुहिम को पास की ही हाउसिंग कॉलोनी के बुद्धिजीवियों को भी बेहद रास रही है। हाउसिंग कॉलोनी के कई लोगों ने संपर्क कर प्रस्ताव रखा कि वे भी माहवारी 50-50 रुपए देने को तैयार हैं। संतोष उनके साथी इस प्रस्ताव के आलोक में संसाधन बढ़ाने के प्रयास में जुट गए हैं।
13 हजार लगा खरीदा ठेला
कचरोंको डंप करने के लिए 13 हजार की लागत से एक ठेला खरीदा गया। इसके अलावा झाड़ू, कुदाल, फावड़े आदि की भी खरीद हुई। संतोष बताते हैं-शुरू में लोगों ने इस दिशा में दिलचस्पी कम थी। लिहाजा उनकी जेब से ही ज्यादा पैसे खर्च हुए। बाद में लोग जागरूक हुए तो मुहिम में साफ मिलता चला गया। लोगों के सहयोग से ही दूसरे ठेले की भी खरीद की गई है। अब मोहल्ले के लोग नगर निगम के भरोसे नहीं है।
माहवारी कलेक्शन सिर्फ 4-5 हजार, खर्च 11 हजार
मोहल्लेसे लोगों से माहवारी कलेक्शन 4 से 5 हजार के बीच होता है, जबकि खर्च हर महीने 11 हजार रुपए है। कचरा बटोरने और उसे डंप करने वाले दो सफाई कर्मियों को हर माह 4-4 हजार रुपए का भुगतान होता है, जबकि नालों की सफाई करने वाले को तीन हजार। ऐसे में संतोष हर महीने अपनी जेब से पैसे लगाते ही हैं, उसी मोहल्ले के प्रभाकर सिंह, मधुकर सिंह, मनीष कुमार, बिट्टू सिंह, गुड्डू सिंह भी आर्थिक सहयोग करते हैं।
इलाके में हर रोज साफ-सफाई के लिए प्रत्येक घर से 50 रुपए मासिक फीस तय है। 75 से अधिक घर इस मुहिम से जुड़ चुके हैं। संतोष खुद हर घर से हर महीने कलेक्शन हासिल करता है। उसने तीन सफाई कर्मियों को बहाल कर रखा है। दो सफाईकर्मी हर रोज सुबह-सुबह हर घर पहुंच कचरा बटोरता है और फिर उसे ठेले में लाद बरटांड़ के एक खाली इलाके में डंप कर आता है। वहीं तीसरा सफाईकर्मी सप्ताह में दो दिन नालियों की सफाई करता है।
सड़क की सफाई करता मजदूर मौजूद संतोष।