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द्वितीय विश्वयुद्ध की दुर्लभ वस्तुओं का संग्रहालय

6 वर्ष पहले
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दुनियामें यूं तो कई दीवाने हैं परंतु नया बाजार निवासी अली अख्तर की बात ही अलग है। अपने घर के तीन कमरों को इन्होंने पूरी तरह संग्रहालय में तब्दील कर दिया है। कमरे में रखे दुर्लभ वस्तुओं को देखने के बाद एकबारगी हैरत तो होती ही है मगर उससे ज्यादा रोमांच भी होता है। वहां रखे धरोहरों को देखने के बाद आज के युग का हर शख्स अचंभित जरूर हो जाएगा कि एक सदी पहले भी इंसान कितना अत्याधुनिक होता था। उनके कमरे में रखे पुराने जमाने की हर वस्तु आज भी पूरी तरह सही हालत में है। अली अख्तर की आंखें में उस वक्त एक अजीब सी चमक देखने को मिली जब उनके संग्रहालय में रखी वस्तुओं के बारे में जानकारी ली गई। ऐसा लगा कि वे अपने अतीत में समा गए हो। उनकी आवाज वस्तुओं के बारे में बताने का अंदाज सब कुछ पुराने चलचित्र के समान आंखों के सामने से गुजरती चली गई। इनके पास एक बाइक भी है जिसपर अमेरिकी सैनिक चला करते थे।

दोनों तरफ घूमने वाला टेबल फैन

अख्तरके संग्रहालय में आगे-पीछे दोनों तरफ ब्लेड वाला टेबल फैन है। पंखे की खासियत है कि यह चारों तरफ घूमता है। इस पंखे के सामने पीछे दोनों तरफ कुल छह ब्लेड है। जो घूमने के दौरान दोनों तरफ हवा बिखेरती है।

कई प्रकार के ग्रामोफोन भी हैं यहां

1950के पहले की कई ग्रामोफोन आज भी उनके संग्रहालय में हैं। सब के सब बगैर बिजली के चलने वाले है। वहां रखे दो-तीन ग्रामोफोन तो 1900 के लगभग की बनी हुई है। इन ग्रामोफोन की रिकार्ड आज के समय में बाजार में बिकनी बंद हो गई है। वे सभी चालू हालत में हैं।

अमेरिकीसेना का था अस्थायी कैम्प

अख्तरबताते है कि युद्ध के समय अमेरिकी सैनिकों ने शहर के नया बाजार में अपना अस्थायी कैम्प बना रखा था। यही से पूरे शहर के लिए अमेरिकी सैनिक आना जाना करते थे। जिले में अमेरिकी सेना का मुख्य कैम्प धनबाद-चास-पुरूलिया मुख्य मार्ग में था। परन्तु शहर में गतिविधियां जारी रखने के लिए अमेरिकी सैनिक ने करीब पांच वर्षों तक नया बाजार के घर को कब्जा कर रखा था।