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7 दिनों का टेंडर 70 मिनट में निपटा दिया और बांट दिए 1 करोड़ के टेंडर

6 वर्ष पहले
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शहर में एलईडी लाइट की रोशनी से पहले ही टेंडर की ऑनलाइन व्यवस्था विवादों के घेरे में गई है। शहर को एलईडी लाइट से जगमग करने के लिए नगर निगम ने जो ई-टेंडर निकाला था, वह महज खानापूर्ति साबित हुआ। अफसरों ने अपने चहेते ठेकेदारों के बीच एक करोड़ रुपए से अधिक का ठेका रेवड़ियों की तरह बांट दिया।
यह खेल पूर्व नगर आयुक्त एके बंका के कार्यकाल में हुआ। नगर आयुक्त और इंजीनियरिंग सेल की मिलीभगत से ऑनलाइन व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया गया। एलईडी लाइट के लिए वेबसाइट पर टेंडर पहली जनवरी को खुला।
आवेदकों को सात दिनों का समय दिया गया। लेकिन यह अवधि समाप्त होने से पहले ही टेंडर का टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड खोल कर ठेका तय कर दिया गया।

टेंडर में भी बजा पूर्व नगर आयुक्त बंका का डंका

नगरनिगम में चाहे ई-टेंडर का मामला हो या ट्रैक्टर खरीद का। सभी में बंका का डंका खूब जोर-शोर से बजा। डंका बजाने में निगम के अफसर, कर्मचारी से लेकर ठेकेदार तक शामिल थे। मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षद भी चुप्पी साधे रहे। एलईडी लाइट के लिए हुए ई-टेंडर के बारे में इंजीनियरिंग सेल के अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
टेंडर से बाहर हुए सप्लायर ने दैनिक भास्कर जो दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं, उन्हें देखकर स्पष्ट हो जाता है कि ई-टेंडर के नाम पर खानापूर्ति की गई है। कुछ खास ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए ही महज कुछ देर के लिए टेंडर को ओपन किया गया और फिर उसे बंद कर दिया गया।

दो फेज में निकाला गया था टेंडर

नगरनिगम ने एलईडी लाइट लगाने का टेंडर दो फेज में जारी किया था। एक टेंडर विधानसभा चुनावों के पहले अखबारों में विज्ञापन देकर निकाला गया। इसमें रांची, देवघर और धनबाद के सप्लायरों ने भाग लिया था। किसी को दो, तो किसी को एक क्षेत्र का ठेका दिया गया। इसके बाद 1.03 करोड़ रुपए का ई-टेंडर निकाला गया। इसी में गड़बड़ी की गई। इसमें निगम के अफसरों के साथ अभियंता भी शामिल थे।

एलईडी लाइट का टेंडर पिछले माह की पहली तारीख को निगम की वेबसाइट http://jharkhandtenders.gov.inपरअपलोड किया गया था। ऑनलाइन आवेदन करने की आखिरी तारीख 7 जनवरी तय थी और 9 जनवरी को टेंडर खोला जाना था। नियमत: सात दिनों तक इस टेंडर को ओपन रखना था, लेकिन इसे सिर्फ 70 मिनटों तक ही ओपन रखा गया।
टेंडर 1 जनवरी को 11:30 बजे से 12:40 बजे तक ही खुला रहा। इस बीच कुछ खास ठेकेदारों से आवेदन कराकर टेंडर को बंद कर दिया गया। यह खुलासा एक सप्लायर ने ही किया है। ई-टेंडर के जरिए जिन तीन ठेकेदारों को सप्लाई ऑर्डर दिए गए हैं, उनमें से एक-एक चास और बोकारो के तथा तीसरा रांची का है।

मामला गंभीर, होगी कार्रवाई

मामला मेरी जानकारी में नहीं है। किसी ठेकेदार या सप्लायर ने भी ऐसी कोई शिकायत नहीं की है। वैसे, अगर टेंडर में गड़बड़ी हुई है, तो इसकी जांच कराई जाएगी और दोषी पर कार्रवाई की जाएगी। ई-टेंडर में गड़बड़ी किसी तकनीकी कारण से हुई है या जानबूझ कर कराई गई, इसकी जांच कराई जाएगी।’’ -इंदु देवी, मेयर

गड़बड़ी की जानकारी नहीं

ई-टेंडर में गड़बड़ी की मुझे जानकारी नहीं है। टेंडर को अगर निर्धारित समय सीमा से पहले ही बंद कर दिया गया, तो इसकी शिकायत उसी समय की जानी चाहिए थी। अब बोलने से क्या फायदा है। वैसे, मैं इस मामले में अफसरों से बात करूंगा। गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी’’ -नीरज सिंह, डिप्टी मेयर

टेंडर प्रक्रिया की जांच होगी

एलईडी लाइट के ई-टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत अभी तक किसी ने नहीं की है। 7 दिनों के बजाय सिर्फ 70 मिनटों तक ही टेंडर खुला रहा, ऐसा संभव नहीं लगता है। लेकिन, अगर ऐसा हुआ है, तो मामले की जांच की जाएगी। वैसे, यह टेंडर मेरे प्रभार लेने से पहले जारी किया गया था।’’’’ सिद्धार्थशंकर चौधरी, नगर आयुक्त।