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खोजो...खोजो..., खोजने वाले को बड़े और छोटे सरकार की तरफ
खोजो...खोजो..., खोजने वाले को बड़े और छोटे सरकार की तरफ से ईनाम। कका... ओ, कका, चोंगा बजा-बजा कर क्या घोषणा कर रहे हैं? का... कोई अपराधी भाग गया है? नहीं रे बचवा... एगो साहब तीर-धनुष लेकर गायब हो गए हैं। तीरवा-धनुषवा वाली पार्टी ने साहब को खोजने का जिम्मा हमें सौंपा है। वाह कका... चुनाव में आपको भी रोजगार मिल ही गया। हां, बचवा...हां, अभी हम भी कामकाज वाला आदमी हैं। ...ऊ तो ठीक है कका..., पर तीरवा-धनुष वाले साहब को खोज क्यों रहे हैं? बचवा... साहब को रिटायर होने के बाद नेता बनने का शौक चढ़ गया। पैसा तो था ही, ऐन-केन जुगाड़ भी लगी दी। बचवा..., धनबाद के पुरान-पुरान कार्यकर्ता तीर-धनुष लेकर घूमते रह गए और साहब का जुगाड़ कमाल कर गया। साहब धनबाद का टिकट लेकर गए। नेता के अवतार ने कई तीर-धनुष वाले का पेट खराब कर दिया। कुछ दिन तो साहब नेतागीरी करते नजर आए, पर नामांकन के बाद ..., अदृश्य हो गए। बचवा... चुनाव में नेता के खोजने पर कार्यकर्ता नहीं मिलता, पर यहां तो कार्यकर्ता के खोज पर नेता ही नहीं मिल रहा। कका... पर एेसा काहे? जब टिकट लिया तो प्रचार तो करेंगे न...? काहे का प्रचार... बचवा। कुछ दिन पहले तक साहब घर से निकले थे, अापन तीर-धनुष के साथियों से भी मिले थे। कुछ ही दिन बाद स्थिति बदल गई। वे जब भी घर से निकले, उनका देख लोग पैसा-पैसा करने लगे। साहब को धन पशु समझ लिया। कका... फिर क्या हुआ। हुआ का ... बचवा, साहब ही अंडरग्राउंड हो गए। घर से निकलेंगे और कोई पैसा-पैसा करेगा। लोग जब फोन करते हैं तो साहब कह देते है... घर से ही प्रचार चल रहा है।
साहब घरवे से मारत बाड़े तीरवा
का कका सुनलऽ