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  • संजय कु. सिंह, मुनिडीह,धनबाद से...

संजय कु. सिंह, मुनिडीह,धनबाद से...

7 वर्ष पहले
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हर शय को तलाश है मंजिल को पाने की

एक-दो जो होशोहवास में हंै

सैकड़ों छलकते पैमाने की

लड़खड़ाते, गिरते-उठते ये देखो एक और गया

सांसें हैं अंतिम, धड़कने हंै मंद

क्योंकि हमारी फितरत है बाबू अभी भी कुछ ढूंढ़ लाने की

हर शय को तलाश है मंजिल को पाने की।

मंजिल की तलाश