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इस दंगल में नई बाजी और नई अदावत

7 वर्ष पहले
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बाजीनई और इसके बाजीगर भी नए। शह और मात की हर चाल नई। आरोप और प्रत्यारोप का दौर भी नया। मुद्दे नए और सिपाह-सालार भी नए। घात का तरीका नया। प्रतिघात का भी तरीका नया। इन नई परिस्थितियों ने झरिया विधानसभा सीट में एक नई राजनीतिक अदावत को जन्म दिया है। कई मायने में साल 2009 के विधानसभा चुनाव से यह चुनाव अलग दिख रहा है। प्रतिद्वंद्वी बदले हुए हैं और उनकी पीढ़ी भी बदली हुई है। 2009 के विधानसभा चुनाव तक यहां सिर्फ भाजपा कांग्रेस नहीं टकराती थीं, इन दोनों पार्टियों के टिकट पर दो पुराने शत्रु टकराते थे। इस बार के चुनाव में दो भाई चुनाव मैदान में हैं। भाइयों की जंग में प्रचार की भाषा और मुद्दा दोनों बदला हुआ दिख रहा है।

कुछ ऐसे अलग दिख रही है झरिया की जंग

बाजीगर

सिपाह-सालार

प्रचार का तरीका

बाजी

दोनों खिलाड़ी हैं नए

अपनों के खिलाफ तनी तलवार

ऐसे अलग है यह चुनाव

2009 के विस चुनाव से पहले

2009 के विस चुनाव से पहले

कोई नहीं कर रहा पारिवारिक हमले

2009 के विस चुनाव से पहले

2009 के विस चुनाव से पहले