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पंचर बनाने वाले पर 62 हजार रुपए का जुर्माना

6 वर्ष पहले
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धनबाद। डीवीसी के अफसर बिजली का अवैध इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई करने के नाम पर वहां मेहनत कर रोजी-रोटी कमाने वालों को मैथन से भगाने की कोशिशों में जुटे हैं। इसलिए उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ भी हजारों और लाखों में जुर्माना ठोंककर केस दर्ज करा दिया, जिन्होंने चंद माह पहले ही वहां दुकान शुरू की है।
मैथन में लेडीज ब्यूटी पार्लर चलाने वाली मधुमिता पर 1.25 लाख का जुर्माना और केस किया गया है। यही नहीं साइकिल का पंचर बनाने वाले पर भी अफसरों ने 62 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया है। यह अफसरों की मनमानी का बेजोड़ नमूना है।
बिना सर्वे कराए कर दिया केस
मैथन के लोगों का कहना है कि डीवीसी प्रबंधन ने अवैध बिजली कनेक्शन का पता लगाने के लिए कोई पड़ताल नहीं की है। उन्होंने मनमाने तरीके से लोगों पर जुर्माना और केस कर दिया है। दैनिक भास्कर ने जब इस बारे में डीवीसी के अफसरों से पूछा, तो वे नहीं बताए कि अवैध बिजली जलाने वाले का सर्वे उन्होंने कब कराया। वे यह भी नहीं बता पा रहे हैं कि कौन लोग कितने समय से डीवीसी की बिजली का अवैध तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।

केस 1 : मैथन मार्केट में मिथिलेश विश्वकर्मा साइकिल का पंचर बनाने वाली दुकान चलाते हैं। दुकान सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक चलती है। इस दौरान उन्हें कभी-कभार ही लाइट जलाने की जरूरत पड़ती है, यानी दिनभर में ज्यादा-से-ज्यादा एक-दो घंटे। डीवीसी ने उनपर 62,024 रुपए का जुर्माना लगाया है और साथ ही एफआईआर भी दर्ज करा दी है। मिथिलेश कहते हैं कि वे इतनी राशि जमा करने की स्थिति में नहीं हैं। डीवीसी ने उन्हें वहां से भगाने के लिए ही इतना जुर्माना लगाया है।

केस 2 : मधुमिता ने पांच महीने पहले मैथन बाजार में बबली लेडीज पार्लर शुरु किया था। पार्लर में सिर्फ दो बल्ब जलाए जाते हैं। डीवीसी ने उनके खिलाफ 1.25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। मधुमिता कहती हैं कि उनके पास जमा करने के लिए इतने रुपए हैं ही नहीं। पार्लर से भी पांच माह में इतनी कमाई नहीं हो सकती। कुछ हजार रुपए कमाए भी, तो वे घर चलाने में ही खर्च हो गए। गिरफ्तारी का भी डर है। उन्हें समझ में नहीं रहा कि वे क्या करें।

जुर्माना करने का यह है नियम
बिजली चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की लंबी-चौड़ी प्रक्रिया है। अगर जांच के दौरान कोई अवैध कनेक्शन पाया जाता है, तो देखा जाता है कि वहां उस समय कितना लोड है। उसके हिसाब से साल भर का शुल्क निकाला जाता है। फिर उसकी दोगुनी राशि जमा करने का नोटिस भेजा जाता है। अगर इसके बाद भी राशि जमा नहीं कराई जाती, तब उस उपभोक्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाती है। डीवीसी प्रबंधन ने ऐसी प्रकिया पूरी नहीं की।

साइकिल का पंचर बनाने वाले पर 62 हजार रुपए का जुर्माना और केस नहीं किया गया होगा। वह जरूर हमारी बिजली का कहीं और इस्तेमाल कर रहा होगा। लेडीज पार्लर पर भी डीवीसी प्रबंधन ने कुछ सोच समझकर ही जुर्माना और केस किया होगा। दोनों मामलों की जांच की जाएगी।'' -एम.विजय कुमार, पीआरओ, डीवीसी।