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माओवादियों के बुने हुए जाल में फंस कर लहूलुहान हुई पुलिस

7 वर्ष पहले
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गोमो (धनबाद). माओवादियों की सोची-समझी चाल थी कि पुलिस उनके चंगुल में फंस जाए और वे पुलिस पर हमला कर दे। दरअसल जिस तरह से नक्सलियों ने केंद्रीय कर्मियों का अपहरण कर ढोलकट्टा जैसे दुरूह क्षेत्र में लाकर रखा और पुलिस तक यह मैसेज भेजने में सफल रहा। यह मैसेज पुलिस को फांसने के लिए तो नहीं था। सूत्र बताते हैं कि नक्सलियों की यह फुल प्रूफ योजना थी कि पुलिस को अपने चंगुल में फंसाया जाए, जिसमें वे सफल भी हो गए।
इधर, डीजीपी राजीव कुमार ने नक्सली को पकड़ने और छोड़े जाने के सवाल पर कहा कि किसी नक्सली की गिरफ्तारी नहीं हुई थी, हमारी योजना थी कि माओवादियों को चारों तरफ से घेरा जाए।
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