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सरकारी स्कूल भवन में चल रही प्राइवेट एकेडमी

9 वर्ष पहले
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धनबाद. कतरास के पंचगढ़ी बस स्टैंड के पीछे पंचगढ़ी कन्या प्राथमिक विद्यालय है। स्कूल कैंपस में घुसते ही सबसे पहले नजर पड़ती है स्कूल वैन पर। चौंकना स्वभाविक है। स्कूल वैन, वो भी सरकारी स्कूल में। अंदर घुसते ही तुरंत एक दूसरी तस्वीर दिखती है। स्कूल के कमरों में टाई और बेल्ट लगाकर प्रॉपर ड्रेस में बच्चे पढ़ रहे हैं।

यह देखकर भी आप चौंक सकते हैं। भास्कर टीम एक बच्चे से पूछती है, किस स्कूल में पढ़ते हो? बच्चा मासूमियत के साथ कहता है, सनराइज एकेडमी। अब मामला स्पष्ट हो जाता है। जी हां, इस सरकारी बालिका स्कूल में दबंगई और शिक्षा विभाग के स्थानीय अफसरों की मिलीभगत से सनराइज एकेडमी नाम का पब्लिक स्कूल चल रहा है।

यही नहीं, सरकारी स्कूल के नाम पर रोज आवंटित किए जा रहे एमडीएम राशन के भी वारे-न्यारे किए जा रहे हैं। ऐसा वर्षों से हो रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग को इसकी भनक तक नहीं है।


चोरी पकड़ी गई, तो कहने लगे केयरटेकर हूं :

भास्कर टीम की मंगलवार को पंचगढ़ी प्राथमिक विद्यालय में सबसे पहले बीके चौधरी से मुलाकात होती है। पहले उन्हें लगता है कि टीम स्कूल की जर्जर इमारत की तस्वीर खींचने आई है। लेकिन जब क्लासरूम में बच्चों और शिक्षकों की तस्वीरें खींची जाने लगती हैं, तो वे घबरा जाते हैं। उनसे सवाल किया गया कि सरकारी स्कूल में पब्लिक स्कूल कैसे चला रहे हैं?

कहने लगे कि वे तो सिर्फ स्कूल की संपत्ति की रक्षा कर रहे हैं। जब पूछा गया कि प्राइवेट स्कूल चला कौन रहा है, तो वे चुप हो गए। फिर एक नई जानकारी देने लगे - सरकारी बालिका विद्यालय यहां से ट्रांसफर कर बगल के स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है। यह भी गलत है, क्योंकि बगल के स्कूल की प्रभारी इससे साफ इनकार कर रही हैं।

एमडीएम के गबन का खेल है यह
कागज पर नामांकन सिर्फ एमडीएम के राशन और राशि को चट करने के लिए दिखाया जा रहा है। पिछले 15 वर्षों से रोजाना यहां सरकारी स्कूल की बच्चियों के नाम पर एमडीएम का राशन और राशि आवंटित की जा रही है।

बच्चियां तो आतीं नहीं, इसलिए ये सारा कुछ शिक्षा विभाग के अफसर और निजी स्कूल के संचालक मिलकर पचा ले रहे हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि एमडीएम का अनाज आते ही बेच दिया जाता है।

सरकारी स्कूल के लिए एक कमरा
इस स्कूल में चार कमरे हैं। भास्कर टीम जब यहां पहुंची, तो तीन कमरों में पब्लिक स्कूल चलता मिला। स्थानीय लोगों ने बताया कि एक कमरे में सरकारी स्कूल के टीचर और कभी-कभी कुछ बच्चे बैठते हैं। यानी तीन कमरों पर पब्लिक स्कूल ने कब्जा कर रखा है। जिस कमरे में सरकारी स्कूल के शिक्षक बैठते हैं, उस कमरे में भी ताला बंद मिला। यानी स्कूल की टाइमिंग में ही शिक्षक नदारद मिले।

बीईईओ सब जानते हैं
पिछले महीने तक इस स्कूल की प्रधानाध्यापिका आशा कुमारी थीं। जनवरी में उनका ट्रांसफर हो गया है। निजी स्कूल चलाने वाले बीके चौधरी का कहना है कि मैडम धनबाद से आती थीं। चूंकि सरकारी स्कूल में बच्चे हैं नहीं, इसलिए मैडम की जानकारी में ही निजी स्कूल चल रहा है। भास्कर ने इस संबंध में आशा कुमारी से बात करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

इसके बाद भास्कर ने एरिया के बीईईओ मनोरंजन पांडे से बात की। मनोरंजन पांडे का कहना है कि पब्लिक स्कूल उनकी जानकारी में चल रहा है। उनका कहना है कि इस भवन में सरकारी और पब्लिक स्कूल दोनों चलते हैं और इसमें कुछ गलत नहीं है। जब उनसे कहा गया कि निजी स्कूल संचालक तो आपको हर महीने पैसे देने की बात कह रहे हैं, तो वो कहने लगे कि इस मामले में संज्ञान लिया जाएगा। साफ है, बीईईओ की जानकारी में ही सारी गड़बड़ी हो रही है।


15 वर्षों से चला रहा है फर्जीवाड़ा
यहां सरकारी स्कूल में पब्लिक स्कूल चलने का मामला 15 वर्षों से अधिक का है। स्थानीय लोगों में इसे लेकर काफी रोष है। उनका कहना है कि आसपास के जो बच्चे सनराइज पब्लिक स्कूल में पढऩे की फीस नहीं अदा कर सकते, उन्हें इस सरकारी स्कूल में पढऩे ही नहीं दिया जाता है।

यहां के शिक्षक और स्थानीय अधिकारियों से भी लोगों ने कई बार शिकायत की है। वे कहते हैं कि शिक्षा विभाग के अधिकारी शिक्षा माफियाओं से पैसे लेकर उन्हें इस तरह की अनियमितता करने की छूट देते हैं।

आगे पढ़े क्या कहते हैं अधिकारी