परमेश्वर के सिमरन में सुख : ज्ञानी शहूर
नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुरजी ने मनुष्य को केवल परमेश्वर की भक्ति करने की प्रेरणा दी। परमेश्वर का सिमरन ही मनुष्य के मन को सदीवी (सदियों) सुख दे सकता है। उक्त बातें मनीफीट गुरुद्वारा मैदान में दरबार साहिब अमृतसर से पहुंचे हजूरी कथावाचक भाई जसविंदर सिंह शहूर ने कहीं। यहां शनिवार से सिख नौजवान सभा के बैनर तले 55वां महान कीर्तन समागम शुरू हुआ, जो तेग बहादुरजी के प्रकाश दिहाड़े को समर्पित है। कथा के माध्यम से भाई जसविंदर सिंह ने श्री गुरुग्रंथ साहिब में दर्ज गुरवाणी साधु गोविंद के गुण गावो। मानस जन्म अमोलक पायो बिरथा काहे गवावो...की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि यह मनुष्य जन्म अनमोल है। बड़े ही अच्छे भाग्य हैं जो कि यह जन्म प्राप्त हुआ है। इसलिए हमें बुराइयों को त्यागकर भक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए। परमेश्वर की भक्ति बिना मनुष्य पशु सामान है।
इस दौरान कीर्तनी जत्था ज्ञानी शमशेर सिंह जगन्नाथपुरी वाले ने भी गुरवाणी-कीर्तन कर संगत को निहाल किया। ढाडी जत्था बीबी बलविंदर कौर खैहरा जलंधर वाले ने भी कवीशरी अंदाज में गुरु के उपदेशों उनकी जीवनी से संगत को अवगत कराया और गुरु घर से जुड़ने को प्रेरित किया। इससे पूर्व गुरुद्वारा के ग्रंथी नरेंद्र सिंह ने भी संगत को गुरु तेग बहादुरजी की जीवनी से अवगत कराया।
मनीफीट गुरुद्वारा में श्री गुरु तेग बहादुरजी के शहीदी दिहाड़े पर कीर्तन करते कीर्तनी उपस्थित संगत।
अखंड पाठ का पड़ा भोग
शिविर में 60 यूनिट रक्त संग्रह
इससे पूर्व गुरुवार से गुरुद्वारा में चल रहे श्री अखंड पाठ साहिब का भोग पड़ा। अरदास उपरांत मैदान में सजे हुए पंडाल तक जुगो-जुग अटल श्री गुरुग्रंथ साहिब की रहनुमाई के लिए शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान संगत वाहेगुरु का जाप करती हुई चल रही थी, जिससे आसपास का इलाका भक्तिमय हो गया। यहां गुरुग्रंथ साहिब का प्रकाश करने के बाद कीर्तन दरबार की शुरुआत हुई, जिसका समापन दोपहर 2.30 बजे हुआ। शाम को भी रहिरास साहिब के पाठ उपरांत रात 11 बजे तक संगत ने गुरवाणी रस में गोते लगाए। कड़ाके की ठंड भी गुरवाणी की भक्ति के आगे फीकी रही और लोग गुरु दरबार में डटे रहे। सभा के नौजवान भी सेवा में डटे रहे। मौके पर मुख्य रूप से तख्त पटना साहिब के झारखंड प्रमुख सरदार शैलेंद्र सिंह ने भी दरबार में मत्था टेका। इस दौरान संगत के बीच गुरु का अटूट लंगर वितरि