मजार पर की गुलपोशी चादरपोशी
मदरसाफैजुल उलूम के संस्थापक और इस्लामी शिक्षाविद अल्लामा अरशदुल कादरी के 13वां सालाना उर्स के अंतिम दिन मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उनके अकीदतमंद और जायरीन ने शिरकत की। मदरसा परिसर में सुबह में कुरान ख्वानी हुई और शाम में कुल शरीफ और अल्लामा अरशदुल कादरी के मजार पर गुलपोशी चादरपोशी की रस्म अदा की गई। इस मौके पर जहां मदरसा के शिक्षक, छात्र और प्रबंध समिति के सदस्य और पदाधिकारी मौजूद थे, वहीं अजमेर दरगाह से आए मुख्य अतिथि मौलाना ख्वाजा मेहंदी हसन, डॉ गुलाम जरकानी, पूर्व विधायक हसन रिजवी, गुलाम यजदानी समेत अन्य अतिथि और गणमान्य लोग मौजूद थे। इससे पूर्व मौलाना मेहंदी हसन ने कार्यक्रम में आने वाले लोगों का स्वागत किया।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में जलसा का आयोजन किया गया। रात नौ बजे से शुरू हुए जलसे की अध्यक्षता डॉ गुलाम जरकानी ने की, जबकि मुख्य वक्ता अजमेर शरीफ स्थित ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह के गद्दी नशीन मौलाना ख्वाजा मेहंदी हसन थे। उन्हें अल्लामा अरशदुल कादरी चैरिटीज की ओर से कायद-ए-अहले सुन्नत अवार्ड से नवाजा गया। इस दौरान मुख्य वक्ता मौलाना मेहंदी हसन और अन्य वक्ताओं ने बुजुर्गान-ए-दीन और सूफी संतों द्वारा भारत में दिए गए पैगाम और उनके योगदान की चर्चा की। कई वक्ताओं ने अल्लामा अरशदुल कादरी की जीवनी पर भी प्रकाश डाला और उन्हें एक मार्गदर्शक बताया।
अल्लामा अरशदुल कादरी के मजार पर चादरपोशी करते लोग।
इन्हें मिली डिग्री
मदरसा से इस साल विभिन्न संकायों में परीक्षा उत्तीर्ण होने और डिग्री हासिल करने वाले 53 छात्रों की दस्तारबंदी की गई। इनमें आलिमः12, कारीः9, हाफिजः32
प्रतियोगिताके विजेता सम्मानित
उर्सके मौके पर किरत,नात ख्वानी,भाषण और लेख प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। प्रथम को डेढ़ हजार ,द्वितीय को एक हजार और तृतीय को पांच सौ रुपए का इनाम दिया गया।
करवानेअहले सुन्नत ने पेश की चादर
करवानेअहले सुन्नत जुगसलाई की ओर से अल्लामा अरशदुल कादरी के उर्स पर फूलों की चादर पेश की गई। यह चादर करवाने अहले सुन्नत के प्रमुख रोशन अली की ओर से उनके पुत्र फहद और अन्य लोगों ने पेश की। रूहानी मर्कज और शेहदा-ए-कर्बला के लोग भी इस मौके पर मौजूद थे। रूहानी मर्कज के हसन रिजवी और कर्बला कमेटी के अब्बास अंसारी और अनवर अली ने भी मजार पर हाजिरी दी।