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50 स्कूलों में से सिर्फ दो में आर्ट्स की पढ़ाई

7 वर्ष पहले
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भलेही आज कॅरियर के विकल्प बढ़े हों, मगर जमशेदपुर के छात्रों की इंजीनियरिंग के प्रति दीवानगी कम नहीं हो रही है। तमाम काउंसलिंग के बावजूद आर्ट्स और ह्यूमनिटीज (मानविकी) के प्रति शहर के विद्यार्थियों अभिभावकों की सोच में बदलाव नहीं रहा है। इस वजह से शहर में सीबीएसई और आईसीएसई संचालित स्कूलों में केवल साइंस और कॉमर्स की पढ़ाई होती है। हालत यह है कि शहर के 50 निजी स्कूलों में केवल लोयोला और सेक्रेड हॉर्ट कॉन्वेंट में ऑर्ट्स स्ट्रीम संचालित है, लेकिन वहां भी सीट खाली रह जाती है। दूसरी ओर, दिसबंर में शहर के स्कूलों में ग्यारहवीं कक्षा के लिए शुरू हुई दाखिला प्रक्रिया में साइंस के लिए मारामारी दिख रही है। हाल ही में डीएवी पब्लिक स्कूल (बिष्टुपुर) में संपन्न ग्यारहवीं की प्रवेश परीक्षा में ढाई हजार विद्यार्थियों ने साइंस में अपनी संभावना तलाशी।

>>कुल सीट : 6500(सीबीएसई-3500, आईसीएसई-3000)

>>साइंसस्ट्रीम में कुल सीट : 4500

>>कॉमर्सस्ट्रीम में कुल सीट : 1900

>>आर्ट्सस्ट्रीम की कुल सीट : 100

इनस्कूलों ने बंद की आर्ट्स की पढ़ाई

>>गुलमोहर हाईस्कूल

>>डीबीएमएसइंग्लिशस्कूल

^बदलाव हो रहा है, लेकिन उसकी गति काफी धीमी है। अभी भी आट्र्स को लेकर पैरेंट्स और छात्रों में स्वीकार्यता कम है। शायद आने वाले दिन में कुछ और बदलाव हो।^विपिन शर्मा,प्रिंसिपल, विद्याभारतीचिन्मया विद्यालय, टेल्को

^औद्योगिक शहर होने के कारण इंजीनियरों की भरमार है। बचपन से ही बच्चे ऐसे माहौल में पलते-बढ़ते और बड़े होते हैं। इस वजह से पैरेंट्स की मानसिकता में बदलाव नहीं रहा है। आर्ट्स को हीनभावना से देखा जाता है। ^रजनी शेखर,प्रिंसिपल,डीबीएमएस स्कूल

विद्यार्थियों की कमी बना कारण

डीबीएमएसइंग्लिश स्कूल की प्रिंसिपल रजनी शेखर ने बताया कि स्कूल ने दो बार ग्यारहवीं में आट्र्स की पढ़ाई शुरू की, लेकिन बड़ी मुश्किल से दो या चार विद्यार्थियों ने इस स्ट्रीम में दाखिला लिया। वे भी पढ़ाई के प्रति गंभीर नहीं होते थे। इतने कम विद्यार्थियों में किसी स्ट्रीम को चलाना मुश्किल था। इस कारण आट्र्स स्ट्रीम के शटर गिराने पड़े।

स्कूलों में बारहवीं की सीटें

एक्सएलआरआई के डीन (एकेडमिक) प्रो. प्रणवेश के अनुसार, हर स्ट्रीम का अपना महत्व है। हम किसी को बड़ा या छोटा नहीं कह सकते। छात्रों को अपनी अभिरुचि के अनुसार स्ट्र