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नई योजना बनाएं : विश्व बैंक

7 वर्ष पहले
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बागबेड़ा गोविंदपुर ग्रामीण जलापूर्ति योजना विश्व बैंक के नियमों पर खरा नहीं उतर रही है। जेएनएनयूआरएम के तहत इन इलाकों में वर्ष 2030 तक की शहरी आबादी को ध्यान में रखकर वृहत जलापूर्ति योजना पहले से ही प्रस्तावित है। ऐसे में विश्व बैंक ने दोनों जलापूर्ति योजनाओं को नए सिरे से तैयार करने के लिए पेयजल स्वच्छता विभाग को निर्देश दिया है। जलापूर्ति योजना का काम धरातल पर उतारने के लिए पेयजल स्वच्छता विभाग त्रुटि दूर करने में जुट गया है।

पेयजल स्वच्छता विभाग के जमशेदपुर ग्रामीण डिवीजन के कार्यपालक अभियंता सुरेश प्रसाद ने बताया कि बागबेड़ा गोविंदपुर विभागीय दृष्टिकोण से ग्रामीण क्षेत्र में पड़ता है। ऐसे में ग्रामीण योजना बनाई गई थी। लेकिन प्रति व्यक्ति पानी की खपत शहरी क्षेत्र के मुताबिक दर्शाया गया है। ऐसे में विश्व बैंक ने शहरी क्षेत्र की तर्ज पर पानी की खपत ग्रामीण क्षेत्रों में किए जाने पर आपत्ति जताई है।

जेएनएनयूआरएम की योजना में पहले से शामिल हैं दोनों क्षेत्र

जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी पुनरूत्थान मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत जमशेदपुर अक्षेस जमशेदपुर ब्लॉक के अधीन गोविंदपुर क्षेत्र के कुछ पंचायत, परसुडीह और बागबेड़ा के कई क्षेत्रों में सरकारी योजना धरातल पर उतारी जानी है। केंद्र सरकार की इस महती योजना का लाभ बागबेड़ा गोविंदपुर के लोगों को भी मिलेगा। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित योजना के लिए जमशेदपुर एग्लोमरेशन अथॉरिटी (जेयूए) के तहत इन इलाकों में जलापूर्ति, सीवरेज ड्रेनेज समेत कई अन्य नागरिक सुविधाएं सरकारी स्तर पर दी जानी है। जेएनएनयूआरएम के तहत वर्ष 2030 तक की शहरी आबादी को ध्यान में रखकर जलापूर्ति योजना धरातल पर उतारा जाना प्रस्तावित है। ऐसे में विश्व बैंक द्वारा योजनाओं पर सवाल उठाने से योजना पर संशय कायम हो गया है।

भारत सरकार के मानक के अनुसार, शहरी क्षेत्र के लिए प्रति व्यक्ति पानी की खपत 135 लीटर है। चूंकि बागबेड़ा गोविंदपुर ग्रामीण इलाके में शामिल है। ऐसे में मानक के हिसाब से विश्व बैंक ने योजना के लिए पानी की खपत आबादी के मुताबिक जलापूर्ति पर सवाल उठाया है। दोनों जलापूर्ति योजनाओं के लिए विश्व बैंक 276 करोड़ राशि देगा। विश्व बैंक की देखरेख में दोनों जलापूर्ति योजना का ग्लोबल टेंडर तक हो चुका है।

क्यों लगा योजना पर ग्रहण

तकनीकी गड़बड़ी होगी दूर

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