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दूसरों के लिए जीने-मरने में असल सुख : शहूर

7 वर्ष पहले
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श्रीगुरु तेग बहादुरजी की शहादत का मुख्य कारण था कि कोई किसी पर जुल्म करे। गुरुजी ने यही संदेश दिया कि सभी को अपने-अपने धर्म की आजादी होनी चाहिए। उस समय इस्लाम धर्म अपनाने को लेकर जगह-जगह जुल्म हो रहे थे। मंदिर बनाने पर पाबंदी थी। ऐसे में श्री गुरु तेग बहादुरजी ने शहीदी देकर यह बता दिया कि अपने लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन दूसरों के लिए जीना-मरना ही जीवन का असल सुख है। भाई जसविंदर सिंह शहूर हजूरी प्रचारक श्री दरबार साहिब अमृतसर वाले रविवार को मनीफीट गुरुद्वारा मैदान में आयोजित कीर्तन दरबार के दूसरे दिन संगत को गुरु वचनों से निहाल कर रहे थे।

भाई जसविंदर सिंह ने गुरु तेग बहादुरजी के साथ भाई मती दास, सती दास आदि की शहीदी की जीवनी बताई, तो संगत की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कथा के माध्यम से संगत को गुरु घर से जुड़ने की प्रेरणा दी। गुरवाणी के शब्द भै काहूं को देत नहि। नहि भै मानत आन.. की व्याख्या करते हुए संगत को उपदेश दिया कि ही किसी से डरना चाहिए और ही किसी को डराना चाहिए।

मनीफीट गुरुद्वारा मैदान में गुरवाणी-कीर्तन सुनती संगत।

इससे पूर्व मनीफीट गुरुद्वारा से सजे हुए पंडाल तक सुबह साढ़े नौ बजे और शाम को भी शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान सतनाम वाहेगुरु के जाप से क्षेत्र भक्तिमय हो गया। डॉ. जसविंदर सिंह द्वारा फिजियोथेरेपी के माध्यम से लोगों की जांच की गई।

>>कईसम्मानित : सुबहके दीवान के दौरान तख्त पटना साहिब के झारखंड प्रमुख सरदार शैलेंद्र सिंह, सीजीपीसी प्रधान इंदरजीत सिंह, मनीफीट गुरुद्वारा के प्रधान दलजीत सिंह, स्त्री सत्संग सभा की प्रधान समेत तमाम कीर्तनी जत्थों को सम्मानित किया गया।

इस दौरान बाबा शमशेर सिंह जगन्नाथपुरी वाले, हजूरी रागी बीबी सरबजीत कौर ने भी गुरवाणी-कीर्तन कर संगत को निहाल किया। बीबी बलविंदर कौर ढाडी जत्था जलंधर वाले ने भी कवीशरी अंदाज में गुरुजी की जीवनी पर प्रकाश डाला। शाम को भी रहिरास साहिब के पाठ उपरांत रात 11 बजे तक कीर्तन दरबार सजा। खराब मौसम में भी संगत की आस्था भारी रही और संगत दूर-दूर से गुरु दरबार में हाजरियां भरने उमड़ी। दोनों वेला संगत के बीच गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया। रात के दीवान उपरांत दूर से आए लोगों को पहुंचाने की सेवा भी नौजवान सभा मनीफीट द्वारा की गई।

दोनों वेला निकली शोभायात्रा

गुरवाणी-कीर्तन सुन संगत निहाल