90 फीसदी से ज्यादा बूथ नक्सल प्रभावित
नक्सली क्षेत्रों में पैदल चलेंगे कर्मी
भास्कर न्यूज | जमशेदपुर/सरायकेला
ईचागढ़विधानसभा क्षेत्र में नब्बे फीसदी से अधिक बूथ संगीन के साए में रहेंगे। इसकी बड़ी वजह है, भाकपा माओवादी का प्रभाव क्षेत्र होना। मतदान के ठीक पहले रविवार को राष्ट्रीय उच्च पथ-33 से कुछ दूरी पर नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर होने के संदेह में गिरिडीह निवासी अजीत कर्मकार की बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना से लोगों में भय है। पश्चिम बंगाल की सीमा से ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र का बड़ा इलाका लगा हुआ है। प्रशासन के लिए यह भी विशेष सतर्कता का सबब बना हुआ है। ईचागढ़ में 285 मतदान केंद्र हैं। उनमें महज 21 ऐसे बूथ चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें सामान्य श्रेणी में रखा गया है, यानी वहां शांतिपूर्वक भयमुक्त मतदान संभव है। शेष 264 बूथों पर शांतिपूर्ण मतदान कराना प्रशासन के लिए चुनौती है। प्रशासन ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रबंध किए हैं।
ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र जमशेदपुर से रांची और पुरुलिया के बीच एनएच 33 और एनएच 32 के बीच बसा हुआ है। बहुद्देशीय सुवर्णरेखा परियोजना के तहत चांडिल डैम यही है। दूसरा पहलू यह है कि यहां पहाड़ और जंगल भी हैं, जो नक्सलियों की शरण स्थली है। तमाड़ विधानसभा क्षेत्र से भी इसका बड़ा हिस्सा लगा हुआ है, जो पूरी तरह नक्सल प्रभाव का इलाका है। नक्सलियों की विशेष निगाह में ईचागढ़ के आने का एक और कारण यह भी है कि दस्ता के पूर्व साथी राम विलास लोहरा बसपा का टिकट लेकर चुनाव मैदान में हैं। वह अभी जेल में है। लोहरा चांडिल प्रखंड के घाट दुलमी गांव से हैं। उनके चुनाव लड़ने से राजनीतिक दलों में हलचल है, तो प्रशासन की भी उन पर और उनके समर्थकों पर कड़ी निगाह है। सभी अति संवेदनशील और संवेदनशील बूथों पर अर्द्धसैनिक बल की तैनाती की तैयारी की गई है। हर गांव तक पक्की सड़क नहीं है। नक्सली बारूदी सुरंग बिछाते हैं और दुश्मन के आने पर विस्फोट करते हैं। जिला पुलिस ने इससे भी निपटने की रणनीति तैयार की है।
कर्मियों को मिली ईवीएम
मतदानकर्मियोंको स्थानीय सामुदायिक भवन परिसर से ईवीएम उपलब्ध कराई गई। पूरे ईचागढ़ विधान सभा क्षेत्र में कुल 285 मतदान केंद्रों पर 285 सीयू एवं 570 बीयू लगाए जाएंगे। इसके अलावे 10 प्रतिशत अतिरिक्त ईवीएम भी तैयार हैं, जो विशेष अवस्था में कार्य करेंगी।
सामग्री के साथ 1290 कर्मी हुए रवा