संसार में केवल प्रेम रहता है : महाराज
जमशेदपुर. संसारमें केवल प्रेम ही रहता है और बिना प्रेम के कुछ भी नहीं। द्वेष का भाव जीव के शरीर के साथ ही खत्म हो जाता है, लेकिन जीव का प्रेम भाव उसके जाने के बाद भी रहता है। प्रेम में विरह के बाद भी प्रेम रहता है, अगर नहीं है तो वह प्रेम नहीं है। यह बातें कथावाचक रामनिवासाचार्य महाराज ने कहीं। वे शनिवार को जुगसलाई स्थित श्री राजस्थान शिव मंदिर में चल रही चौदह दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के दौरान उद्धव-गोपी संवाद, भ्रमर गीत प्रसंग पर प्रकाश डाल रहे थे। शनिवार को कथा का 11वां दिन था। कथा 23 सितंबर तक चलेगी।