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हजरत हस्सान की सुन्नत...

7 वर्ष पहले
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मदरसाफैजुल उलूम के संस्थापक अल्लामा अरशदुल कादरी के 13वें सालाना उर्स कार्यक्रम के दूसरे दिन सोमवार को नातिया मुशायरे से महफिल सजाई गई। इससे पूर्व दिन में लेख और भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। भाषण प्रतियोगिता में मौलाना हारून रशीद, मौलाना इम्तियाज, मौलाना सगीर आलम फैजी और लेख प्रतियोगिता में प्रो. अहमद बद्र, मुफ्ती आबिद हुसैन और मौलाना इजहार आलम ने जज की भूमिका निभाई।

रात में मदरसा फैजुल उलूम परिसर में नातिया मुशायरे का आयोजन हुआ। इसमें देश के कई स्थानों से आए शायरों ने शिरकत की। मुशायरा का नाम तरही और मनकबती मुशायरा था। इस तरह के मुशायरे में पहले से ही आयोजकों की ओर से शायरों को पंक्तियां दे दी जाती हैं। उसी के आधार पर शायर अपनी शायरी पेश करता है। इस साल आयोजकों की ओर से जो शहर-ए-तैयबा को तस्सवर में जमाना है, हमें और कैसे निकालूं दिल से मैं उनके ख्याल को... पंक्तियां गई थीं। मुशायरे की अध्यक्षता डॉ गुलाम जरकानी ने की।

हबीब हाशमी (कोलकाता), इलियास फैजी, अयाज उल रब अरशी (दोनों बोकारो), हैरत गोंडवी, दिलकश रांचवी, हबीब उल्लाह फैजी, मुजफ्फर बनारसी, जमीर उद्दीन जमजम, मेराजुद्दीन संभली, लियाकत मेंहदी (पुरुलिया), इबरार कैसर औरंगाबादी, रौनक बोकारवी, कारी इस्राईल, अब्दुस्स्लाम (लेाहरदगा), असर फैजी, निसार अहमद, अतहर बोकारवी, अयूब फैजी।

हजरत हस्सान की सुन्नत को निभाना है हमें, नात लिखकर अपने आका को सुनाना है हमें। (सैयद सदफ सईद, पटना)

अब असी तरह से हम याद करेंगे उनको, उर्स हर साल यूं ही इनका मनाना है हमें। (अफजल हुसैन )

सरवर-ए-कौनैन की चौखट पर जाना है हमें, उनके रौजा-ए-पाक पे किस्मत बनाना है हमें। (उस्मान हैदर)

जलजला, जेर जबर मिसाल हैं हथियारों के, सबको अरशद का अहसान सुनाना है हमें। (हबीब रजा)

अब इस तरह से याद करेंगे उनको, उर्स हर साल यूं ही मनाना है हमें। (रौनक बोकारवी )

ये शायर हुए शामिल

मुशायरे की कुछ चुनिंदा पंक्तियां

उर्स के मुख्य कार्यक्रम आज

अल्लामाअरशदुल कादरी के 13वें उर्स के मुख्य कार्यक्रम मंगलवार को होंगे। हाजी मौलाना मो. मुख्तार ने उर्स के संबंध में बताया कि मंगलवार की सुबह नमाज फज्र यानी सुबह की नमाज के बाद मदरसा परिसर में अल्लामा के मज़ार शरीफ पर कुरान ख्वानी और शाम 4.35 बजे कुल शरीफ और चादरपोशी होगी। रात में उलमाये केराम की तक