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जिउतिया आज से, महिलाएं रखेंगी निर्जला व्रत
पुत्रकी दीर्घायु की कामना का व्रत जिउतिया की तैयारी शुरू हो गई है। सोमवार को नहाय खाय के बाद मंगलवार को महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और उन्हें हर अनिष्ट से बचाने के लिए निर्जला उपवास रहकर व्रत रखती हैं। धर्मशास्त्रों में भी इस व्रत का विशेष महत्व है। दिनभर व्रत रखकर माताएं शाम को चील और सियारिन की कथा सुनती हैं। व्रत के दूसरे दिन पारण के साथ व्रत संपन्न होता है। ऐसी मान्यता है कि जिस व्रती के जितने पुत्र होते हैं, उतनी गांठें जिउतिया में दी जाती हैं। बुधवार को व्रत का पारण होगा।
पंडितों के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की उदया अष्टमी तिथि को यह व्रत किया जाता है। व्रत की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है। पुत्र की दीर्घायु के लिए उपवास करने वाली माताएं गुरुवार को नहाने के बाद भोजन करेंगी और चील-सियारिन को भोजन देकर उपवास शुरू करेंगी। इस व्रत को जिउतिया के नाम से जाना जाता है। व्रत को लेकर पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं, जिसमें चील और सियारिन की कथा भी शामिल है। व्रत में पूरे विधि-विधान से निर्जला उपवास करना शुभ फलदायी माना गया है।
व्रती स्नान करने के बाद भगवान सूर्य नारायण की प्रतिमा को स्नान कराएं। धूप, दीप आदि से आरती करें भोग लगाएं। कथा सुने। जिउतिया की माला धारण करें।
यहभी करें
>>सोमवारकी रात 10.37 बजे के पहले ओठगन कर लें।
>>ओठगन के दौरान पान खीरा साथ में जरूर रखें।
>>नवमी को पारण दिनभर कर सकती हैं।
>>पूजा कीसामग्री : धूप,दीप, पुसी केराव (हरा छोटा मटर), खीरा, झींगा का पत्ता, सूता का बंधन फूल।
पूजा की विधि
^काशी पंचांगों के अनुसार, 15 सितंबर को रात्रि 10:37 बजे तक सप्तमी समाप्ति के बाद अष्टमी तिथि लग रही है। अष्टमी तिथि 16 सितंबर को रात्रि 11:06 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लगेगी। सूर्योदय कालीन अष्टमी में व्रत करके तिथि के अंत में नवमी तिथि में पारण करना वर्णित है। इस प्रकार 15 सितंबर को दिन में नहाय-खाय, रात्रि में शुद्घ भोजन, सुबह में सरगही 16 सितंबर को उदया अष्टमी तिथि में जिउतिया व्रत और पूजन करना श्रेयस्कर रहेगा।^पंडित रमेशकुमार उपाध्याय शास्त्री, ज्योतिषाचार्य