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इंदरजीत की प्रधानगी पक्की

7 वर्ष पहले
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सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (सीजीपीसी) के चुनाव के मद्देनजर समाज के दो गुटों में चल रहे समझौते के बीच शनिवार को नया मोड़ आया।

सीजीपीसी प्रधान इंदरजीत सिंह और सरदार शैलेंद्र सिंह ने टिनप्लेट के कार्यवाहक प्रधान गुरचरण सिंह बिल्ला को मना लिया, जो दोनों के समझौते की मजबूत कड़ी थी। यहां पक्ष के बिल्ला गुट को गुरुद्वारा से हटाने में विपक्ष ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा था, जबकि बिल्ला नहीं मान रहे थे। शनिवार को सीजीपीसी कार्यालय में आयोजित बैठक और इससे पूर्व समझौता प्रकरण के बीच हुए जोड़-तोड़ में बिल्ला ने कार्यवाहक प्रधानगी से हटने पर हामी जता दी।

^सभी झगड़ों को समाप्त करने की कोशिश जारी है। टिनप्लेट के प्रधान ने भी सर्वसम्मति में सीजीपीसी को सहयोग देकर मिसाल कायम की है।^ इंदरजीतसिंह, सीजीपीसीके प्रधान

इंदरजीत की कुर्सी के लिए माने बिल्ला

सिखसमाज में हो रही चर्चा के मुताबिक, इतने लंबे समय के बाद आखिरकार बिल्ला ने इंदरजीत सिंह की कुर्सी सुरक्षित रखने की बात पर नोटिस लेने पर हामी भरी है। बिल्ला इंदरजीत गुट से हैं, जबकि शैलेंद्र सिंह विपक्षी खेमे से। समझौते को लेकर दोनों सिख नेताओं के एक होने पर ही टिनप्लेट का विवाद दूर हो सका है। अब यहां सीजीपीसी चुनाव के बाद चुनाव या फिर सर्वसम्मति पर प्रधान पद पर मुहर लगेगी। शैलेंद्र और इंदरजीत के समझौते के बीच परविंदर सिंह सोहल की बेदाग छवि को देखते हुए उन्हें प्रधानगी सौंपी जा सकती है। इधर, विपक्षी खेमे के उम्मीदवार मंजीत सिंह चुनाव कराने की बात कह रहे हैं।

^यह सर्वसम्मति प्रधानगी बचाने नहीं, बल्कि समाज की एका के लिए जरूरी है। इंदरजीत सिंह सुलझे इंसान हैं। उन्हें एक मौका और मिलना चाहिए।^शैलेंद्र सिंह,तख्तपटना साहिब के सदस्य