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इधर मां की पूजा, उधर पितरों का तर्पण

7 वर्ष पहले
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12.37 बजे तक शुभ मुहूर्त

शारदीयनवरात्र 25 सितंबर से शुरू होगा। गुरुवार को ही कलश स्थापना होगी। उस दिन प्रात:काल से लेकर दोपहर 12.37 बजे तक प्रतिपदा तिथि हस्त नक्षत्र है। इसलिए 12.37 बजे तक ही कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है। इसके बाद दूज यानी द्वितीया हो जाएगी। ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश कुमार उपाध्याय शास्त्री के अनुसार, प्रतिपदा तिथि में ही कलश स्थापना करनी चाहिए। पहले दिन कलश स्थापना के साथ प्रथम शैलपुत्री का दर्शन-पूजन प्रतिष्ठा होगी।

कलश स्थापना का चौघड़िया मुहूर्त

कालीबाड़ी में महालया अमावस्या महोत्सव

बेल्डीहकालीबाड़ी में महालया अमावस्या महोत्सव पर अनेक धार्मिक अनुष्ठान हुए। इसमें सैकड़ों की संख्या में भक्त शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत मां काली की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इस दौरान भक्तों द्वारा मां के जयकारे लगाए गए। पूजा की समाप्ति के बाद भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में मोनू भट्टाचार्या ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

दुर्गाबाड़ीमें भक्तों ने की मां की पूजा

साकचीस्थित दुर्गाबाड़ी में महालया अमावस्या महोत्सव में अनेक गणमान्य शामिल हुए। मां दुर्गा की आराधना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद मां के गीत गाए गए। मौके पर मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया था। कार्यक्रम के अंत में भक्तों के बीच भोग वितरण किया गया। अनुष्ठान को सफल बनाने में जमशेदपुर दुर्गाबाड़ी समिति के जयजीत मल्लिक, देव, एस दास आदि ने योगदान दिया।

भालूबासा में मां की पूजा करते श्रद्धालु।

भालूबासा में मंगलवार को महालया अमावस्या पर पूजा की गई। मौके पर अनेक अनुष्ठान हुए। इस दौरान मां काली की विशेष पूजा-अर्चना हुई। मां के स्नान शृंगार के साथ पूजा की शुरुआत हुई। इस दौरान कलाकारों द्वारा भजन-कीर्तन किया गया। आयोजन को सफल बनाने में अचिंतम दास, अदिति सेनगुप्ता का अहम योगदान रहा। वहीं, नामदा बस्ती (गोलमुरी) स्थित हिंदू काली मंदिर समिति की ओर से मंगलवार को महालया अमावस्या पूजा की गई। साथ ही मां भवतारिणी का 67वां स्थापना दिवस भी मनाया गया। आयोजन में आरएन नाग, एम ओझा, मधुसूदन साव, एम घोषाल समेत अन्य सदस्यों ने योगदान दिया।

मां के जयघोष से गूंजा भालूबासा

कलश में सभी देवताओं का वास

माताके कलश में मां के अलावा सभी देवताओं का वास होता है। मुख में विष्णु, कंठ में