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सरकारी अधिसूचना के आधार पर मिले मालिकाना : आजसू

7 वर्ष पहले
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जिले में अल्जाइमर्स के 250 मरीज

जमशेदपुर | आजसूपार्टी की बैठक रविवार को जाकिरनगर में मो. नासिर की अध्यक्षता में हुई। इसमें पार्टी के महानगर अध्यक्ष बाबर खान ने कहा कि 1971 में जारी सरकारी अधिसूचना के आधार पर मानगो और जुगसलाई में लंबे समय से सरकारी जमीन पर रहने वालों को मालिकाना हक मिलना चाहिए। वहीं 30 साल तक सरकारी भूमि पर निर्विवाद रहने वालों को जमीन बंदोबस्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानगो और जुगसलाई में आठ साल पहले भू सर्वेक्षण शुरू हुआ था। बंदोबस्त विभाग में अनुबंध के आधार पर बहाल हुए कर्मचारियों को हटाते हुए भू सर्वेक्षण का कार्य रोक दिया गया। बाबर ने भू सर्वेक्षण कार्य दोबारा चालू करने की मांग की। बैठक में दिनेशलाल, गणेश भुइयां, मजरुल हक, चंद्रेश्वर सिंह, बबलू प्रमाणिक, विश्वजीत मुखर्जी, डी. मुखर्जी, सतीश सिंह, मनोज सिंह, नासिर, अब्दुल आिद मौजदू थे।

ये हैं बीमारी के लक्षण

{तुरंतकिया हुआ काम भूल जाना

{परिवार के सदस्यों के साथ-साथ अपना नाम भूल जाना

{दिशा का ज्ञान नहीं रहना

{बौद्धिक क्षमता में कमी

{सामान का नाम भूल जाना

{समय का ज्ञान नहीं होना

{व्यक्तित्व में परिवर्तन।

क्या है डिमेंशिया और अल्जाइमर

डॉगिरि के अनुसार, डिमेंशिया में रोगी सामान्य बातें भूलने के साथ ही अपनी बौद्धिक क्षमता खो बैठते हैं। इसमें मरीज भाषा, सामान का नाम, समय का ज्ञान, यहां तक कि अपना पता तक भूल सकता है। सामान्य रूप से डिमेंशिया क्रॉनिकल अथवा ब्रेन इंज्युरी के कारण होता है। अल्जाइमर्स के पीडि़तों में भी लगभग यही लक्षण होते हैं, परंतु इसका मुख्य कारण बढ़ती आयु होती है। सामान्य तौर पर 55 वर्ष के बाद इस रोग के होने की आशंका रहती है। इसकी शुरुआत छोटी-मोटी भूल से होती है।

60 वर्ष के बाद भूलने की समस्या आम

डॉगिरि के अनुसार, अल्जाइमर्स के रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी का कारण लोगों में इस रोग की जानकारी का अभाव है। ज्यादातर लोगों का मानना है कि 60 की उम्र होने पर भूलने की समस्या आम है। लेकिन, यह सही नहीं है। अगर आरंभ में ही इस पर ध्यान दिया जाए और इलाज आरंभ करवा दिया जाए, तो इस रोग को बढऩे से रोका जा सकता है।