भागवत से जीव का उद्धार : महाराज
जमशेदपुर। ज्ञानमें अगर अहंकार का समावेश हो जाए, तो अहंकार को भक्ति, समर्पण और प्रेम के हाथों पराजित होना पड़ता है। यह बातें जुगसलाई स्थित श्री राजस्थान शिव मंदिर में चल रहे श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ के बारहवें दिन रविवार को कथावाचक रामनिवासाचार्य महाराज ने कहीं। इस दौरान उन्होंने रुक्मिणी विवाह, द्वारिका स्थापन और उत्तर चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भागवत और महाभारत के कृष्ण के पात्र चरित्र में काफी अंतर है। भागवत के कृष्ण स्वयं भगवान हैं और महाभारत के कृष्ण एक कुशल राजनीतिज्ञ, शांति दूत प्रशासक थे। महाभारत में एक परिवार की आंतरिक घटनाओं का विस्तृत वर्णन के साथ इतिहास है, जबकि श्रीमदभागवत जीव का उद्धार करने वाला ग्रंथ है। कथा की शुरुआत व्यासपीठ की पूजा-अर्चना के साथ हुई। वहीं, समापन महाआरती के साथ हुआ। इस दौरान बजरंग अग्रवाल, मंटू अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल, निर्मल काबरा, रतन मेंगोतिया, रमेश माहेश्वरी, छित्तर मल धूत, पंडित कल्याण दत्त शास्त्री, पंडित पवन त्रिवेदी, सांवर लाल शर्मा, रामेश्वर लाल शर्मा, पवन सिंगोदिया, पुरुषोत्तम दास भौतिका, प्रभुदयाल शर्मा, पवन काबरा आदि उपस्थित थे।