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भगवान को संकीर्तन पसंद : महाराज

7 वर्ष पहले
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जमशेदपुर। परमात्माभक्त के घर पर मिलते हैं, क्योंकि भगवान को भक्त का संकीर्तन पसंद है। प्रेम की कोई परिभाषा नहीं होती है। आज के परिप्रेक्ष्य में तो प्रेम में वासना और स्वार्थ का समावेश हो जाता है। प्रेम अवर्णनीय, निर्गुण और कामना रहित होता है। पदार्थ आधारित प्रेम महत्वहीन है। भक्त और भगवान के बीच प्रेम का स्‍वरूप, तो श्रीकृष्ण और गोपियों के बीच के प्रेम जैसा होता है। यह बातें रविवार को जुगसलाई स्थित श्री राजस्थान शिव मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथावाचक रामानिवासाचार्य महाराज ने कहीं। उन्होंने कहा कि जहां दोनों पक्ष परस्पर विरह और समर्पण की परिधि में हमेशा बंधे रहते हैं, वह निष्काम भक्ति का शिखर स्‍वरूप है। येथे उपस्थित : निर्मलकुमार काबरा, रतन काबरा, प्रभुदयाल शर्मा, सांवर लाल शर्मा, रामेश्वर लाल शर्मा, बिमल मुरारका, ओमप्रकाश अग्रवाल, रतन गनेडीवाल, पंडित कल्याण दत्त शास्त्री, पंडित नवीन शर्मा आदि।