- Hindi News
- पितृपक्ष : तर्पण पर दिख रहा महंगाई का असर
पितृपक्ष : तर्पण पर दिख रहा महंगाई का असर
पूर्वजोंके प्रति श्रद्धा का महापर्व तर्पण पितृपक्ष में श्रद्धाभाव के साथ मनाया जा रहा है। परिवार के मुखिया सुबह स्नान कर तोराई पत्ते में उड़द दाल डालकर पितरों को तर्पण कर रहे हैं। 15 दिनों तक चलने वाले इस पितृपक्ष में तरोई सब्जी की मांग बढ़ गई है। यह भी 60 से 70 रुपए प्रतिकिलो बिक रही है। इसके अलावा उड़द की दाल भी 75 रुपए किलो मिल रही है। महंगाई की मार से पितृपक्ष भी बेअसर नहीं है। इस पक्ष में उदड़ दाल और तरोई का विशेष महत्व है, पर इस समय दोनों की कीमत आसमान छू रही है। ऐसे में लोगों की जेब ढीली हो रही है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का काफी महत्व है। भाद्र पक्ष की पूर्णिमा से अाश्विन पक्ष की अमावस्या तक पितृपक्ष श्रद्धा से मनाया जाता है। पितृपक्ष मुख्य रूप से पितृ ऋण का पर्व माना जाता है। पूजा सामग्रियों की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं।
पितृपक्ष के बारे में पंडित रामबलि तिवारी का कहना है कि इस पक्ष में पुत्र अपने पूर्जवों की आत्मा की शांति के लिए हाथों में कुश धारण कर हर रोज स्नान के बाद जल तिल से उन्हें तिलांजलि अर्पित करें। तिवारी ने बताया कि प्रत्येक तिथि का अपना अलग-अलग महत्व है। इस पखवाड़े में नवमी तिथि का खास महत्व है। इस दिन सभी पूर्वज खासकर महिलाओं को याद कर तिलांजलि दी जाती है। पितृ तर्पण करने से देवतुल्य पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख शांति बनी रहती है।
क्या कहते हैं पंडित