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नए सत्र से एमबीबीएस में इबोला फ्लू की पढ़ाई

7 वर्ष पहले
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अब एमबीबीएस के छात्रों को इबोला, स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू जैसी संक्रामक बीमारियों की पहचान और उनका इलाज करना पढ़ाया जाएगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) एमबीबीएस के सिलेबस में बदलाव कर रही है। एमबीबीएस के नए सिलेबस में आधा दर्जन से ज्यादा प्रकार की पैथोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल जांच को शामिल किया जा रहा है। एमसीआई ने एमबीबीएस का नया सिलेबस बनाना शुरू कर दिया है, जो मई 2015 में जारी होगा।

एमसीआई की अध्यक्ष डॉ जयश्री मेहता ने बताया है कि अस्पतालों में नई-नई बीमारियों के मरीज पहुंच रहे हैं। इसके इलाज के बारे में अधिकतर चिकित्सकों को जानकारी नहीं है। इस कारण मरीजों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। जबकि इन बीमारियों का इलाज शुरुआत में ही उसकी पहचान होने पर संभव है। इस कारण अब स्वाइन फ्लू, इबोला, हेपेटाइटिस-बी, सी के संक्रमण की पहचान और उसके इलाज की प्रक्रिया को एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

डॉ मेहता ने बताया कि एमबीबीएस के अलावा पीजी कोर्स के सिलेबस को भी रिवाइज किया जाएगा। इसके लिए सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के डीन से सुझाव मांगे गए हैं।

नए सिलेबस में बढ़ेंगे चैप्टर

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ एएन मिश्रा ने बताया कि एमबीबीएस के नए सिलेबस में नई बीमारियों की पहचान और इलाज के 8 चैप्टर रहेंगे, जो एडिशनल होंगे। फिलहाल काउंसिल के बोर्ड ऑफ गवर्नर ने वर्तमान सिलेबस में चैप्टर कम करने पर रोक लगा रखी है। इस वजह से वर्तमान सिलेबस में किसी प्रकार की कांट-छांट नहीं होगी, लेकिन नए चैप्टर जुड़ेंगे। इसकी योजना बना ली गई है।

सोनोग्राफी और ईसीजी रिपोर्ट रीडिंग की ट्रेनिंग

काउंसिल अफसरों ने बताया कि एमबीबीएस के नए सिलेबस में सोनोग्राफी और ईसीजी रिपोर्ट रीडिंग की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। देखने में आया है कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर के अस्पतालों में दोनों प्रकार की जांच होने के बावजूद नए चिकित्सक को रिपोर्ट को समझाने में परेशानी होती है। इसके लिए विशेषज्ञ की मदद लेना पड़ती है। नए सिलेबस के तहत सोनोग्राफी और ईसीजी रीडिंग की ट्रेनिंग होने से नए डॉक्टर रिपोर्ट देखकर मरीज का इलाज कर सकेंगे।