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मन के विकार को खत्म करने के लिए करें मंथन : भूमानंद

6 वर्ष पहले
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जमशेदपुर | मनुष्यअपने अंदर की शक्तियों का उपयोग करके ही जीवन में पूर्णता को प्राप्त कर सकता है। इसके लिए मनुष्य को आत्मनिरीक्षण करना होगा। यह बातें सर्किट हाउस एरिया स्थित आत्मीय वैभव विकास केंद्र (सीआईआरडी) में चल रहे 51वें वार्षिक ज्ञान यज्ञ में शनिवार को स्वामी भूमानंद तीर्थजी ने कही।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने मन के विकारों की खुद ही खोज करनी चाहिए और उसे समाप्त करने के लिए बार-बार प्रयास करना चाहिए। मन के विकार को समाप्त करने या किसी गुण के धारण के लिए मनुष्य को प्रतिदिन कम से कम 45 मिनट मंथन करना चाहिए। यह कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में ब्रह्मविद्या सेंटर के आरएस तिवारी, प्रो. एसआर साहू, एनके दास, सुजीत सेनगुप्ता महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।