लाइब्रेरियन की भूमिका बदली : सुनील
जेवियरलेबर रिलेशंस इंस्टीट्यूट (एक्सएलआरआई), जमशेदपुर के प्रमुख (ब्रांड एंड सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर) सुनील वर्गीस ने कहा कि आज के डिजिटल युग में लाइब्रेरियन की भूमिका बदल गई है। वर्गीस रविवार को सोसायटी फॉर डॉक्यूमेंटेशन एंड इन्फॉर्मेशन साइंस (एसडीआईएस) और झारखंड इन्फॉर्मेशन एंड लाइब्रेरी एसोसिएशन (जेआईएलए), रांची के संयुक्त तत्वावधान में इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, साकची के प्रेक्षागृह में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में बोल रहे थे। बदलते वैश्विक परिदृश्य में लाइब्रेरियन की भूमिका विषय पर उन्होंने कहा कि आज जब सूचनाएं ऑनलाइन हो गई हैं, वैसे में लगता है कि लाइब्रेरी अप्रासंगिक हो गई है। लेकिन, ऐसी बात नहीं है।
सुनील वर्गीस ने कहा कि ऑनलाइन उपलब्ध सूचनाओं की विश्वसनीयता बेहद कम है। आज भी सही और विश्वसनीय सूचनाओं के लिए लोग लाइब्रेरी का सहारा लेते हैं। मुख्य अतिथि ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी ने लाइब्रेरियन की भूमिका को नए रूप में परिभाषित किया है। आज की नई पीढ़ी की सूचना की भूख को मद्देनजर रखते हुए लाइब्रेरियन को नई तकनीक से लैस होना होगा।
इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, साकची के प्रेक्षागृह में कार्यक्रम का उदघाटन करते सुनील वर्गीस अन्य।
मनोविज्ञान को समझें : डॉ. गोस्वामी
एसडीआईएस के प्रेसिडेंट डॉ. एनजी गोस्वामी ने कहा कि आज लाइब्रेरियन केवल लाइब्रेरी का कस्टोडियन (देखने वाला) भर नहीं है। उनकी भूमिका पार्टनर की हो गई है, जो सूचनाओं के संग्रह के साथ ही उसे यूजर्स तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है। अब लाइब्रेरियन को केवल पुस्तकों के टाइटल (शीर्षक) और लेखकों के नाम तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। उसे पुस्तकों की विषय वस्तु की भी पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि वह यूजर्स तक सही नॉलेज और सूचना कम समय में पहुंचा सके। डॉ. गोस्वामी ने कहा कि भविष्य के लाइब्रेरियन को केवल सूचना संपन्न होना होगा, बल्कि उन्हें यूजर्स के मनोविज्ञान को भी समझना होगा। आईटी के क्षेत्र में आई क्रांति के बाद लाइब्रेरियन की भूमिका पूरी तरह बदल गई है। यूजर्स अपने वेब पेज पर सारी सूचनाएं चाहता है। लाइब्रेरी में जाने की बाध्यता खत्म होती जा रही है। ऐसे में लाइब्रेरियन को टेक्नो सेवी बनना होगा। जेआईएलए, रांची के सेक्रेटरी शिव प्रकाश ने कहा कि आज की जरूरत है कि हम झारखंड की लाइब्रेरी को नया रूप दें औ