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कंपनियों पंडालों में विराजेंगे देव शिल्पी विश्वकर्मा

7 वर्ष पहले
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भगवानविश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर बुधवार को शहर में धूमधाम से की जाएगी। इसके लिए साकची, मानगो और बिष्टुपुर बस स्टैंड में विशेष तैयारी की गई है। वहीं, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स समेत शहर की अन्य कंपनियों में भी भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी। शहर के विभिन्न इलाकों में पूजा पंडाल बनाकर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित की जाती है।

वैसे तो इस दिन लोहे के औजार, वाहनों और मशीन की पूजा की जाती है, लेकिन श्रद्धालु अपने घर में भी निर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं। सोमवार को पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए शहर के बाजारों में भीड़ देखने को मिली। लोग पूजा की सामग्री खरीदते नजर आए।

साकची बाजार में खरीदारी करते लोग।

चौघड़िया मुहूर्त

लाभ: प्रात:सुबह 5.32 बजे से 7.04 बजे तक, शाम 4.15 बजे से 5.47 बजे तक

अमृत: सुबह7.04 बजे से 8.36 बजे तक, रात्रि 8.45 बजे से 10.11 बजे तक

शुभ: सुबह10.07 बजे से 11.39 बजे तक, शाम 7.15 बजे से 8.43 बजे तक

चर: दोपहर2.45 बजे से 4.15 बजे तक, रात्रि 11.00 बजे से 11.39 बजे तक

(ज्योतिषाचार्यपंडित रमेश कुमार उपाध्याय के अनुसार)

यहां भी होती है पूजा

मानगो गोलचक्कर, बोधनलवाला गैरेज, बिष्टुपुर, ट्रांसपोर्टनगर, मानगो, कदमा ऑटो स्टैंड, सोनारी एरोड्रम, बारीडीह बाजार।

3400तक की मूर्ति

स्थानीयकलाकारों द्वारा बनाई हुई प्रतिमाओं के साथ ही कोलकाता से लाई हुई मूर्तियों को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। बाजार में आकर्षक प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ देखी गई। मूर्तियों के दाम 300 से 3400 रुपए तक हैं।

पूजा को लेकर उत्साह

बड़ी और छोटी सभी कंपनियों में विश्वकर्मा पूजा को लेकर काफी उत्साह है। यहां पूजा की विशेष तैयारी की जा रही है। बुधवार को प्रतिमा स्थापना के साथ विधि-विधान से पूजा शुरू हो जाएगी। दूसरे दिन भोग के साथ आराधना की जाएगी और तीसरे दिन हवन के बाद विसर्जन किया जाएगा।

सोनेकी लंका भी बनाई

भगवानविश्वकर्मा देवतों ने शिल्पी हैं। उन्होंने ही स्वर्ग को गढ़ा। भगवान विश्वकर्मा त्रेतायुग में रावण के कहने पर सोने की लंका बनाई। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने विश्वकर्मा भगवान की पूजा और उनसे रातों रात इंद्रप्रस्थ महल तैयार कराया।