दुर्घटनाघटती है।
हमारेदेश में इतने कानून बने हुए हंै कि सभी को जानना मुश्किल है। इसी कानून की भीड़ में बाल-श्रमिक कानून अधिनियम भी है। जिसमें 14 वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों से काम करवाना अपराध है। इस कानून का उल्लंघन करने वालों को जुर्माना या दंड का प्रावधान है। प्रश्न यह है कि इस कानून की जमीनी हकीकत क्या है? आज भी चौक-चौराहों, होटलों में कम उम्र के बच्चे काम करते देखे जा सकते हंै, इस कानून को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है।
दुर्घटनाघटती है। सड़क पर घायल पड़ा नजर आता है। कार-बाइक फरफराती निकल जाती हैं। लोग पैदल भी गुजर जाते हैं। सब कुछ देख कर अनदेखा करते। क्या हम बेहद क्रूर हो चुके हैं! क्या हममें मानवता का एक कण भी शेष नहीं! असल में हम चाहकर भी उदासीन बने रहते हैं। शायद अप्रिय झंझट में पड़ने से बचने के लिए। अस्पताल में पूछताछ। पुलिस की पूछताछ। कोर्ट की गवाही। एेसा प्रतीत होता है कि दुर्घटना का अपराध हमारा है। हमें अपने को निर्दोष सिद्ध करना है। उचित होगा, पुलिस का, अस्पताल का, सहायता करने वालों के प्रति अपना नजरिया बदलना। तभी लोग मानवता का परिचय देंगे।
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चीन की चाल को समझें
बाल श्रमिक अधिनियम कड़ाई से लागू करें
सहायता करने से क्यों कतरा रहे हैं लोग!